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नीट परीक्षा पैटर्न में बदलाव को लेकर NTA ने क्यों साध रखी है चुप्पी?

छात्र यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि क्या अगले साल से मेडिकल कॉलेजों के स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा यानी नीट परीक्षा के पैटर्न में बदलाव किया जाएगा? कारण, पिछले साल इस परीक्षा में अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद परीक्षा के पैटर्न में बदलाव की मांग जोर पकड़ रही है। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र सरकार ने इस पूरी परीक्षण प्रक्रिया में व्यापक बदलाव की सिफ़ारिश करने के लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का भी गठन किया है। लेकिन, इस परीक्षा का आयोजन करने वाली राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने फिलहाल इन बातों पर चुप्पी साध रखी है। उसका कहना है कि वह परीक्षण प्रक्रिया में आमूलचूल परिवर्तन की सिफारिश करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। 

दरअसल, आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. विवेक पांडेय ने एक आरटीआई फाइल की थी। इसमें उन्होंने जुलाई और अगस्त 2024 में नीट 2025 परीक्षा पैटर्न में बदलावों को लेकर हुई चर्चाओं की जानकारी मांगी थी। विवेक पांडे को सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत दिए गए जवाब में केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) ने कहा, ‘मांगी गई जानकारी आपके इच्छित रूप में उपलब्ध नहीं है। इसलिए, यह जानकारी आपको नहीं दी जा सकती है।’ 

डॉ. पांडेय इस जवाब से संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने पहली अपील दायर की। इसके अलावा उन्होंने किसी भी उपलब्ध जानकारी के लिए अनुरोध किया। अपने आरटीआई आवेदन में डॉ. पांडेय ने समिति की बैठकों के आधिकारिक रिकॉर्ड मांगे थे। इसके अलावा उन्होंने आरटीआई अधिनियम 2005 की धारा 20(1) का हवाला दिया। यह धारा भ्रामक या अधूरी जानकारी प्रदान करने पर जुर्माने का प्रावधान करती है। जुर्माना धारा के तहत, जानकारी उपलब्ध कराने तक प्रतिदिन ₹250 का जुर्माना, अधिकतम ₹25,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

इसके अलावा उन्होंने आरटीआई अधिनियम 2005 की धारा 20(1) का हवाला दिया। यह धारा भ्रामक या अधूरी जानकारी प्रदान करने पर जुर्माने का प्रावधान करती है। जुर्माना धारा के तहत, जानकारी उपलब्ध कराने तक प्रतिदिन ₹250 का जुर्माना, अधिकतम ₹25,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

इस अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए, एनटीए का कहना था, ‘सीपीआईओ का जवाब पर्याप्त है, आपकी ओर से मांगी जानकारी उपलब्ध नहीं है और इसलिए उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसके अलावा, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर, सरकार ने एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है, जिसकी रिपोर्ट का इंतजार है।’

आरटीआई के जवाब में आई प्रतिक्रिया से नीट यूजी उम्मीदवारों के बीच चिंता का माहौल है। परीक्षा पैटर्न में कोई भी बदलाव लाखों छात्रों को प्रभावित कर सकता है। नीट परीक्षा फॉर्मेट प्रारूप में छोटे से छोटा बदलाव भी इस बात को प्रभावित कर सकता है कि छात्र परीक्षा की तैयारी कैसे करते हैं और उसमें कैसे बैठते हैं। 

एनटीए के सूत्रों का कहना है कि जब तक कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर गाइडलाइंस नहीं आ जाती, तब तक यह तय नहीं किया जा सकता है कि कौन सा एग्जाम कंप्यूटर बेस्ड होगा और कौन सा एग्जाम पेन एंड पेपर मोड में होगा? भारत में मेडिकल कोर्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में से एक, नीट यूजी छात्रों के शैक्षणिक भविष्य और देश में जरूरी मेडिकल सुविधाओं को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

 

Asmita Sarkar

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