
उत्तराखंड में छात्रसंघ चुनाव नहीं होने से छात्रों में आक्रोश है। छात्र लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर उत्तराखंड में छात्र नेता सड़कों पर उतर गए हैं। इसी बीच अल्मोड़ा में सोमवार को प्रदर्शन के बीच विवि के टाइगर ग्रुप के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी दीपक लोहनी ने पुलिस की घेराबंदी के बीच अपने ऊपर पेट्रोल डालकर आत्मदाह की कोशिश की। पुलिसकर्मियों, अग्निशमन दस्ते के जवानों तथा छात्रों ने उसे बमुश्किल बचाया। यह घटना तब हुई जब दोपहर के समय सभी संगठन के लोग एक साथ मिलकर अल्मोड़ा के चौघानपाटा में उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत का पुतला दहन कर रहे थे।
अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार दीपक करीब 20 से 25 प्रतिशत तक झुलस गया है। उसे जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। वैसे तो चौघानपाटा में गांधी पार्क के बाहर आत्मदाह की चेतावनी एनएसयूआई के अध्यक्ष पद के दावेदार अमित बिष्ट ने दी थी, लेकिन आत्मदाह का प्रयास कर रहे अमित और उसके समर्थकों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया पर अचानक दीपक लोहनी ने खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा लिया।
बताया गया है कि पुलिस की घेराबंदी के बीच अमित दोपहर 01: 27 बजे शिखर होटल की तरफ से सिर पर काला कपड़ा बांधकर पहुंचा। उसके साथ कई अन्य छात्र भी थे। जैसे ही पार्क के बाहर पहुंचकर अमित ने अपने ऊपर पेट्रोल छिड़कने का प्रयास किया, पुलिस ने उसे पकड़कर गाड़ी में डाल लिया।
इसी बीच, भीड़ में से निकलकर आए छात्र नेता दीपक लोहनी ने अपने कपड़ों में छिपाकर लाई गई बोतल से अपने ऊपर पेट्रोल छिड़क कर खुद को आग लगा ली। उसके हाथ और पेट झुलस गए। अग्निशमन दस्ते के जवानों तथा पुलिसकर्मियों ने बड़ी मुश्किल से आग पर काबू पाया। आग बुझाने के प्रयास में दो और छात्र मामूली तौर पर झुलस गए।
दीपक को छात्रों और पुलिस कर्मियों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया। यहां उसका इलाज चल रहा है। छात्र नेताओं ने उसे अन्यत्र रेफर करने की मांग की लेकिन चिकित्सकों ने उसकी हालत खतरे से बाहर बताते हुए रेफर करने से इन्कार कर दिया। एसएसपी देवेंद्र पींचा ने बताया कि दीपक लाेहनी की हालत खतरे से बाहर है। इस बारे में कानूनी कार्रवाई करने के लिए नए कानूनी प्रावधानों का अध्ययन किया जा रहा है।
जिला अस्पताल में भर्ती छात्र नेता दीपक लोहनी ने बताया कि छात्रसंघ चुनाव नहीं होने को लेकर वह काफी तनाव में है। चुनाव के लिए वह काफी समय से मेहनत भी कर रहे थे। जब किसी चीज का फल नहीं मिलता है, तो काफी दुख होता है। इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया। छात्र संघ चुनाव नहीं होने को लेकर उन्होंने सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को गलत ठहराया है।




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