
अब ‘मिडिल क्लास’ परिवार के बच्चे पैसों की कमी के चलते उच्च शिक्षा से वंचित नहीं रह सकेंगे। केंद्र सरकार ने पीएम विद्यालक्ष्मी योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना का मकसद है कि मेधावी छात्रों की पढ़ाई में अड़चन न आए। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए बताया कि पीएम विद्यालक्ष्मी योजना का लाभ एजुकेशन लोन में मिलेगा। उन्होंने बताया कि जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई के लिए बैंकों से 10 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण सस्ती दरों पर लिया जा सकेगा।
पीएम विद्यालक्ष्मी योजना के तहत 8 लाख सालाना से कम आमदनी वाले परिवार के बच्चे को 3% की ब्याज सब्सिडी के तहत 10 लाख रुपये तक का लोन दिया जाएगा।7.5 लाख रुपये तक के ऋण पर भारत सरकार 75% क्रेडिट गारंटी देगी। उन्होंने कहा कि मिशन मोड तंत्र शिक्षा के विस्तार को सुगम बनाएगा। शिक्षा ऋण गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा संस्थान (QHEI) में प्रवेश लेने वाले छात्रों के पाठ्यक्रम से संबंधित ट्यूशन फीस और अन्य खर्चों की पूरी राशि को कवर करेगा। वैष्णव ने बताया कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों से समर्थन-मुक्त (Collateral Free), गारंटर-मुक्त (Guarantor) ऋण लिया जा सकेगा।
पीएम विद्या लक्ष्मी एजुकेशन योजना के तहत छात्रों को सरल और डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से बिना गारंटी के शिक्षा ऋण मिलेगा। इसमें सबसे कम ब्याज सब्सिडी के साथ कम आय वाले परिवारों को लोन दिया जाएगा। इस योजना के तहत सभी बैंकों द्वारा डिजिटल आवेदन प्रक्रिया के जरिए कम समय में और आसानी से लोन मिलेगा। इसमें लोन आवेदन के लिए सभी बैंक एकीकृत डिजिटल फॉर्मेट उपलब्ध कराएंगे। बैंकों के ऐप और वेबसाइट पर इसका आवेदन करना होगा।
पीएम विद्या लक्ष्मी एजुकेशन योजना में आवेदन करने के लिए छात्र का आधार कार्ड, फोटो, पहचान पत्र और पिछले एजुकेशन के सभी दस्तावेज लगेंगे। बता दें देश में 850 उच्च शिक्षा संस्थान हैं, जिनमें हर साल करीब 22 लाख छात्र दाखिला लेते हैं।




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