
यूपीपीएससी की पीसीएस और आरओ-एआरओ की प्रारंभिक परीक्षा एक ही दिन और एक ही पाली में कराने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों द्वारा शुरू किया गया विरोध प्रदर्शन अब भी जारी है। अभ्यर्थी यह भी मांग कर रहे हैं कि मूल्यांकन के लिए नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। वे अपनी मांग पर सख्ती से अड़े हुए हैं। पीछे हटने को तैयार नहीं।
छात्रों की मांग है कि एक दिन में एक शिफ्ट में ही पीसीएस प्री 2024 और आरओ और एआरओ प्री की परीक्षाएं कराई जाएं। दो दिन की परीक्षा में अलग-अलग शिफ्ट में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों के एक समान मूल्यांकन के लिए आयोग ने नॉर्मलाइजेशन (मानकीकरण) को लागू कर दिया, लेकिन आयोग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह फॉर्मूला काम कैसे करेगा।
अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग ने पसेंटाइल स्कोर निकालने का फॉर्मूला तो बता दिया लेकिन नॉर्मलाइजेशन कैसे करेंगे। यह फॉर्मूला वैज्ञानिक रूप से कारगर है या नहीं, इस बात पर भी संदेह है। जिन परीक्षा में नॉर्मलाइजेशन लागू किया गया, ये परीक्षाएं हमेशा विवादों में रहीं हैं।
प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि अगर पर्याप्त संख्या में केंद्र न मिलने के कारण दो दिन परीक्षा कराने और एक समान मूल्यांकन के लिए नॉर्मलाइजेशन लागू करने की कोई मजबूरी है तो इसका भी समाधान है। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के मद्देनजर जिस शासनादेश के तहत केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया को सख्त बनाया गया है और निजी स्कूल-कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है, उस शासनादेश में संशोधन भी किया जा सकता है।
छात्रों का कहना है कि सरकारी मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, विश्वविद्यालयों, पॉलीटेक्निक को भी परीक्षा केंद्र बनाया जा सकता है। वैसे भी प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और परीक्षा कराने की जिम्मेदारी शासन की है तो छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है। इसकी क्या गारंटी की दो दिन परीक्षा कराने में पेपर लीक नहीं होगा।
जिस तरह छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज हो रहा है, उससे आयोग पर आंदोलन को खत्म कराने का दबाव बढ़ गया है। हालांकि आयोग की ओर से अपने निर्णय के पक्ष में कई तर्क दिए गए हैं।
आयोग के प्रवक्ता ने कहा कि आयोग ने नॉर्मलाइजेशन का फॉर्मूला पारदर्शी तरीके से प्रतियोगी छात्रों के बीच रखा। जहां किसी एक विज्ञापन के सापेक्ष एकाधिक दिवसों/पालियों में परीक्षायें आयोजित करायी जाती हैं, वहां परीक्षा के मूल्यांकन के लिए प्रसामान्यीकरण की प्रक्रिया अपनायी जानी आवश्यक है, जैसा कि देश के विभिन्न प्रतिष्ठित भर्ती निकायों, आयोगों आदि में अपनायी जाती है। मा. न्यायालय के विभिन्न निर्णयों द्वारा व्याख्यायित भी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नीट परीक्षा हेतु गठित राधाकृष्णन कमेटी द्वारा भी दो पालियों में परीक्षा कराने की अनुशंसा की गई है, वहीं, पुलिस भर्ती परीक्षा भी कई पालियों में कराई गई। आयोग के प्रवक्ता ने कहा कि पूरी व्यवस्था में न्यूनतम हयूमन इंटरफेयरेन्स सुनिश्चित किया जा रहा है। सब कुछ सिस्टम ड्रिवेन है। तकनीक का उपयोग कर व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। मूल्यांकन में रोल नं० को फेक नं० में परिवर्तित कर नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया की जाएगी, जिससे किसी अभ्यर्थी का रोल नं० मालूम नहीं चलेगा एवं मूल्यांकन प्रक्रिया पूर्ण रुप से पारदर्शी होगी।
आयोग के प्रवक्ता ने कहा कि अभ्यर्थियों की सुविधा और बदलते दौर की आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए पीसीएस की मुख्य परीक्षा से वैकल्पिक विषय हटाने का अभूतपूर्व निर्णय लिया गया। मुख्य परीक्षा में सभी परीक्षार्थियों के लिए प्रश्नपत्र और एक तरह और अनिवार्य होने की स्थिति में परीक्षार्थियों के बीच प्रतियोगिता के लिए समान अवसर पैदा हुये हैं। प्रतियोगी छात्रों को अक्सर यह शिकायत रहती थी कि स्केलिंग की वजह से मानविकी विषयों और हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के नंबर कम हो जाते हैं और विज्ञान विषय एवं अंग्रेजी माध्यम के अभ्यर्थियों के अंक बढ़ जाते हैं। अब वैकल्पिक विषय हट जाने से इस शिकायत का निराकरण हो गया है। उपरोक्त व्यवस्था का परिणाम यह हुआ कि अभ्यर्थियों के लम्बे समय से स्केलिंग हटाने की मांग पूर्ण हुयी और अपारदर्शी प्रणाली समाप्त हुयी।




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