
बिहार सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा में लाने के लिए एक बड़ी पहल की है। जल्द ही बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की देखरेख में विशेष शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह कदम राज्य के समावेशी शिक्षा प्रयासों को मजबूती देगा।
यह प्रक्रिया पूर्ण होते ही दिव्यांग बच्चों को भी बेहतर शिक्षा मिलने लगेगी। इसके साथ ही सभी बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का कार्य किया जा रहा है। उक्त बातें बिहार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहीं। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदानऔर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद करना है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि विशेष शिक्षक, दिव्यांग बच्चों की विशेष जरूरतों को समझते हुए उन्हें ऐसी शिक्षा देंगे, जो उनके व्यक्तिगत विकास के लिए उपयोगी हो। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार की तरफ से शिक्षा पर एक बड़ा बजट खर्च किया जा रहा है। 1990 के दौर में पूरे बिहार का बजट मात्र 25 हजार करोड़ था। अभी वर्तमान की सरकार केवल शिक्षा पर 70 हजार करोड़ का बजट खर्च कर रही है। नियोजित शिक्षकों को भी सरकार ने राज्य कर्मी का दर्जा देने का कार्य किया है।
मंत्री ने बताया कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार तेजी से विकास करने का कार्य कर रहा है। बिहार में शिक्षा की दशा को सुधारने का कार्य लगातार किया जा रहा है। शिक्षक अपना कार्य पूरी ईमानदारी के साथ करें। साथ ही बिहार में शिक्षा का स्तर भी सुधरा है।
आने वाले दिनों में शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने का कार्य किया जाएगा, ताकि राज्य के युवाओं को बाहर नहीं जाना पड़े। वहीं शिक्षकों को हर साल दो बाद प्रशिक्षण देने का कार्य किया जाएगा। इसको लेकर सभी जिलों में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) को बेहतर बनाने का कार्य किया जाएगा।
शिक्षा मंत्री ने प्राइवेट स्कूलों को नियमित करने की दिशा में भी कड़े कदम उठाए हैं। बिना रजिस्ट्रेशन वाले स्कूलों पर कार्रवाई, प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के आधार कार्ड को सरकारी स्कूल से लिंक करना जैसे कदम शिक्षा की पारदर्शिता और गुणवत्ता को सुनिश्चित करेंगे।




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