
कानून की पढ़ाई सिर्फ एक प्रोफेशन भर ही नहीं है, बल्कि यह उन तमाम जरूरतमंद लोगों को सिस्टम के साथ जोड़ने में एक अति महत्वपूर्ण कड़ी है, जो तमाम कारणों से अन्याय के शिकार होते हैं। देश में ला प्रोफेशनल्स की जवाबदेही, किसी भी दूसरे प्रोफेशन से अधिक हो जाती है, क्योंकि यह कानून के शासन पर भरोसा पैदा करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।
कानून के जानकारों को हम वकील कहते हैं और वकील बनने के लिए आपको लॉ की पढ़ाई करनी पड़ती है। काननू की पढ़ाई के लिए आपको किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से (10+2) या इसके समकक्ष परीक्षा कुल मिलाकर कम से कम 45% अंकों के साथ पास होना चाहिए। इसके बाद ही आप स्नातक स्तर पर लॉ की पढ़ाई के लिए आवेदन कर सकते हैं। यानी कानून या लॉ की पढ़ाई का प्रथम चरण होता है एलएलबी मतलब बैचलर आफ लॉ। वैसे ग्रेजुएशन के बाद भी लॉ की पढ़ाई की जा सकती है और तब यह मात्र 3 साल का होता है। एलएलबी के बाद एलएलएम और पीएचडी जैसी विशेषज्ञता भी आप हासिल कर सकते हैं और बाद के दिनों में आप न्यायपालिका की परीक्षा देकर जज बनने की भी कोशिश कर सकते हैं। एलएलएम पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से एलएलबी या समकक्ष डिग्री होनी चाहिए। कानून में पीएचडी करने के लिए उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर डिग्री होनी चाहिए और कुल मिलाकर 55% से कम अंक होने चाहिए। पीएचडी पाठ्यक्रम में सीट सुरक्षित करने के लिए उन्हें विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित अनुसंधान प्रवेश परीक्षा में शामिल होना होगा और इंटरव्यू देना होगा।
बहरहाल, एलएलबी की पढ़ाई के लिए किसी संस्थान में प्रवेश हेतु आपको सीएलएटी (CLAT) एग्जामिनेशन देना पड़ता है, जिसे कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट कहा जाता है और यह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी द्वारा ऑर्गेनाइज किया जाता है। एग्जाम में आपसे लॉजिकल रीजनिंग, लीगल, एटीट्यूड, गणित, अंग्रेजी और जनरल क्वेश्चन पूछे जाते हैं। इसके बाद 5 साल के कोर्स में आप एडमिशन ले सकते हैं। सामान्यतः पांच साल के इन्टीग्रेटेड कोर्स के एंट्रेंस हेतु 200 अंकों के क्वेश्चन पेपर के लिए डेढ़ घंटे का टाइम दिया जाता है। इसमें इंग्लिश के 30 अंक, सामान्य ज्ञान के 50 अंक, लीगल एप्टीट्यूड के 20 अंक, लीगल रीजनिंग के 20 अंक होते हैं एवं 30 अंकों का एक एस्से भी लिखना होता है।
मगर ऐसा भी नहीं है कि कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) में सफल नहीं होने वाले अभ्यर्थियों की लॉ की पढाई की इच्छा पूरी नहीं हो सकती। कुछ निजी और स्वायत्त विश्वविद्यालय अपनी प्रवेश परीक्षा स्वयं आयोजित करते हैं। ऑल इंडिया कॉमन लॉ एंट्रेंस टेस्ट यानी AICLET भी इस दिशा में आपकी इच्छा की पूर्ति कर सकता है। यह देशभर के उन निजी संस्थानों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है, जो कानून की पढ़ाई उपलब्ध कराते हैं। इस प्रवेश परीक्षा के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए आप इसकी आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं। जो छात्र विदेशी विश्वविद्यालयों/संस्थानों से कानून की पढ़ाई करना चाहते हैं, वे लॉ स्कूल प्रवेश परीक्षा (LSAT) के लिए आवेदन कर सकते हैं।
बहरहाल, लॉ करने के बाद आपको इंटर्नशिप का कोर्स करना होता है और इस दौरान आपको काफी कुछ ट्रेनिंग मिलती है। इंटर्नशिप के बाद आपको किसी भी राज्य के स्टेट बार काउंसिल में इनरोलमेंट के लिए अप्लाई करना होता है और उसके बाद ऑल इंडिया बार कौंसिल का एग्जामिनेशन क्लियर करने के बाद आपको प्रैक्टिस का सर्टिफिकेट मिल जाता है और इसके बाद आप वकील बन जाते हैं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया एलएलबी पूरा करने के बाद उम्मीदवारों को “प्रैक्टिस का प्रमाण पत्र” प्रदान करता है। कानून के पेशे में अभ्यास करने और प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए, उम्मीदवारों को अखिल भारतीय बार परीक्षा (एआईबीई) उत्तीर्ण करना अनिवार्य है।
लॉ की केटेगरी देखें तो मुख्यतः कॉर्पोरेट लॉ, क्रिमिनल लॉ, पेटेंट, एटर्नी, फैमिली लॉ, साइबर लॉ और बैंकिंग ला के रूप को गिनाया जा सकता है और किसी भी विषय में बाद में आप खुद को स्पेशलाइज कर सकते हैं। जैसा कि नाम के साथ ही स्पष्ट है कि पर्टिकुलर फील्ड में आप सम्बंधित क्षेत्र की विशेषज्ञता की हद तक जानकारी लेंगे। वर्तमान में इस कोर्स के स्कोप की बात करने की ज़रुरत नहीं है, क्योंकि ट्रेडिशनल अदालती प्रैक्टिस के अलावा कॉरपोरेट वर्ल्ड में, एनजीओ में, बैंकिंग सेक्टर में, सरकार एवं उसके संस्थानों में, स्वतंत्र पत्रकारिता (फ्रीलांस जर्नलिज्म) में, सेना तक में, लॉ फर्म्स के साथ-साथ.न्यायिक सेवा तक में इसका विस्तार है।
लॉ करने के लिए देश भर के कुछ अच्छे कॉलेजों की बात करें तो नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इण्डिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु, नलसार (NALSAR) यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद, नेशनल लॉ इन्स्टीट्यूट यूनिवर्सिटी, भोपाल, द वेस्ट बेंगाल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ ज्युरीडिकल साइंस, कोलकाता, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, जोधपुर, हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, रायपुर, गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, अहमदाबाद, डॉ. राममनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, लखनऊ, राजीव गाँधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, पटियाला, चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, पटना, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ एडवांस्ड लागल स्टडीज, कोच्चि का नाम मुख्य रूप से गिनाया जा सकता है।




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