
दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव 2024 में एनएसयूआई ने परचम लहराया है। कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में सात साल बाद वापसी करते हुए अध्यक्ष और संयुक्त सचिव पद पर जीत हासिल की। एनएसयूआई के रौनक खत्री ने अध्यक्ष और लोकेश ने संयुक्त सचिव पद पर शानदार जीत हासिल की है। एनएसयूआई के रौनक खत्री ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के उम्मीदवार ऋषभ चौधरी को 1,300 से अधिक मतों से हराया। खत्री को 20,207 मत मिले जबकि चौधरी को 18,864 मत हासिल हुए। वहीं उपाध्यक्ष पद पर ABVP के भानू प्रताप और सचिव पद पर ABVP के मृत्रवृंदा ने जीत दर्ज कराई है।
बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी कैंपस में फैली गंदगी को देखते हुए नतीजों पर रोक लगा दी थी। फिर सफाई के बाद मतगणना की अनुमति दी गई। इसी वजह से मतगणना और रिजल्ट जारी करने में देरी हुई है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि प्रचार के दौरान हुई गंदगी को साफ करने के बाद ही मतगणना की अनुमति दी जाएगी।
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने सभी कॉलेजों, विभागों, संस्थानों और केंद्रों को 24 नवंबर 2024 को बैलेट पेपर की गिनती और 25 नवंबर 2024 को ईवीएम वोट काउंटिंग का निर्देश दिया था। सभी मॉर्निंग कॉलेजों में मतगणना सुबह 8 बजे से और ईवनिंग कॉलेजों में दोपहर 2 बजे से शुरू हुई थी।
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव 2024 में यूनिवर्सिटी के कुल 52 कॉलेजों के स्टूडेंट्स ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। कुल 1,45,893 मतदाताओं में से 51,300 स्टूडेंट्स ने वोट किया।
डूसू में पिछले 10 सालों से एबीवीपी का दबदबा देखा जा रहा है। हालांकि इस साल एबीवीपी और एनएसयूआई के कैंडिडेट्स के बीच कांटे की टक्कर देखी गयी। पिछले साल एबीवीपी ने अध्यक्ष समेत 3 पदों पर जीत हासिल की थी। वहीं, उपाध्यक्ष की सीट एनएसयूआई को मिली थी। इस बार अध्यक्ष पद और संयुक्त सचिव पद पर एनएसयूआई ने बाजी मारी है। वहीं एबीवीपी के हिस्से उपाध्यक्ष और सचिव पद आया।
डूसू के चार प्रमुख पदों के लिए 21 उम्मीदवार मैदान में थे। गत 28 सितंबर को परिणाम घोषित होने थे, लेकिन दिल्ली विश्वविद्यालय और राजधानी के अन्य क्षेत्रों में पोस्टर और बैनर से गंदगी फैलने पर उच्च न्यायालय ने परिणामों की घोषणा पर रोक लगा दी थी। सफाई के बाद 26 नवंबर तक मतगणना की अनुमति दी गई है। पहले डीयू ने 21 नवंबर को मतगणना का प्रस्ताव रखा था, लेकिन सफाई पूरी न होने के कारण इसे 25 नवंबर को मतगणना कराने का निर्णय लिया गया।




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