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देश में हर पांच एमएसएमई में से एक की कमान महिलाओं के पास, स्टार्टअप्स 86% की गति से बढ़े

वैश्विक निवेशक 82 वर्षीय जिम रोजर्स ने कहा है कि भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत दशकों बाद सही आर्थिक फैसले ले रहा है। भारत की विकास दर जी20 देशों में सर्वाधिक 7 फीसदी है। भारत की मजबूत जीडीपी वृद्धि लगातार जारी है, 2023-24 में 8.2% की वृद्धि दर के साथ, यह विश्व स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गया है।

सवाल उठता है कि देश की अर्थव्यवस्था में यह सकारात्मक बदलाव आख़िरकार क्यों देखने को मिल रहा है? तो जवाब है, देश का एमएसएमई और स्टार्टअप्स क्षेत्र। एमएसएमई और स्टार्टअप्स ने देश की अर्थव्यवस्था में वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। छोटे और मझोले उद्योगों के विकास ने देश की अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा प्रदान की है। 

हाल ही में एमएसएमई और स्टार्टअप्स क्षेत्र से जुड़ी एक रिपोर्ट भी सामने आई है जो देश की अर्थव्यवस्था की दृष्टि से काफी सकारात्मक है। रिपोर्ट के आंकड़े उम्मीद जगाने वाले हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2016-2023 के दौरान देश में स्टार्टअप्स 86% की गति से बढ़े हैं। वहीं, एमएसएमई की बात करें तो वे भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 30% योगदान देने के साथ 1.5 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।

यूग्रो कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार देश की अर्थव्यवस्था में एनबीएफसी सेक्टर का लचीलापन और अनुकूलन क्षमता का प्रदर्शन किया है। उनके लिए ऋण की उपलब्धता भी पहले की तुलना में बहुत बेहतर हुई हे। बीते पांच वर्षों की बात करें तो एनबीएफसी की एयूएम (असेट अंडर मैनेजमेंट) 15% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ रही है। यूग्रो की यह रिपोर्ट देश के 39,000 से अधिक एमएसएमई के आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है। 

रिपोर्ट के अनुसार भारत ने प्रतिबंधात्मक मौद्रिक नीतियों, भू-राजनीतिक अनिश्चितता, व्यापार प्रतिबंधों और आपूर्ति शृंखला के व्यवधानों के बावजूद वित्त वर्ष 2024 में 8.2% की वृद्धि हासिल की। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि भारत आने वाले वर्षों में समृद्ध और मध्यम वर्ग की आबादी बढ़ने, भौतिक व डिजिटल बुनियादी ढांचे के विकास और कामकाजी लोगों की संख्या बढ़ने का फायदा उठाकर वृद्धि दर हासिल कर सकता है। 

एमएसएमई पर आधारित इस रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 18 से वित्त वर्ष 22 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद में एमएसएमई क्षेत्र का योगदान लगभग 29% -30% रहा। वहीं, UDYAM पर पंजीकृत कुल एमएसएमई में महिला एमएसएमई की हिस्सेदारी 20% है। अनौपचारिक सूक्ष्म उद्यमों (आईएमई) की बात करें तो जनवरी 2024 तक, महिलाओं के स्वामित्व वाले आईएमई का कुल आईएमई में 71% से अधिक हिस्सा है।

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 30 वर्षों में, भारत ने 16 वर्षों में 7% से अधिक की वृद्धि दर हासिल की है। भारत की मजबूती का आलम यह है कि, वैश्विक जीडीपी में इसका योगदान 2009 की तुलना में 2029 तक दोगुना होने की उम्मीद है। इसके अलावा, डॉलर में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी भी 2029 तक दोगुनी होने की प्रबल संभावना है।

उद्यम पोर्टल पर पंजीकरण करने वाले एमएसएमई की संख्या वित्त वर्ष 2011 में पोर्टल शुरू होने के बाद से हर साल दोगुनी हुई। यह छोटे व्यवसायों के तेजी से हुए औपचारिकीकरण को दर्शाता है। यह बदलाव वित्तीय सहायता, सब्सिडी और बाजार पहुंच जैसी विभिन्न सरकारी नीतिगत पहलों तक एमएसएमई की पहुंच में सुधार का संकेत देता है। उद्यम पोर्टल पर महिलाओं के नेतृत्व वाले एमएसएमई का पंजीकरण भी सालाना दोगुना हो रहा है। वर्तमान में, पांच पंजीकृत एमएसएमई में से एक का नेतृत्व महिलाओं के पास है। ये व्यवसाय कम निवेश और टर्नओवर के साथ भी एमएसएमई की ओर से मुहैया कराई जा रही पांच नौकरियों में से एक में योगदान करते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार एमएसएमई के पंजीकरण के मामले में महाराष्ट्र अग्रणी है। कुल पंजीकृत एमएसएमई का 14% है। इसके बाद उत्तर प्रदेश (11%) और तमिलनाडु (9%) का नंबर है। आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र के एमएसएमई ने सबसे अधिक 12.4% रोजगार दिया। वित्त वर्ष 2011 से अगस्त 2023 के दौरान रोजगार के मामले में इसके बाद तमिलनाडु (10.9%) और उत्तर प्रदेश (9.1%) का स्थान रहा।

रिपोर्ट के अनुसार भारत का स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र जीवंत बना हुआ है। डीपीआईआईटी के अनुसार, भारत में 119,000 से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं, जो 2016-2023 के दौरान 86% की सीएजीआर से बढे। मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स ने 1.25 मिलियन से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा करके रोजगार परिदृश्य पर पर्याप्त प्रभाव डाला है। लगभग 55,000 (-46%) मान्यता प्राप्त स्टार्टअप में कम से कम एक महिला निदेशक है। महिलाओं के नेतृत्व वाले स्टार्टअप में, अधिकांश आईटी/आईटीईएस क्षेत्र (12%) में हैं, इसके बाद स्वास्थ्य सेवा (10%) और शिक्षा (6%) हैं। टियर-2 और टियर-3 शहर एक गतिशील स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा दे रहे हैं, 50% स्टार्टअप इन जगहों से आते हैं।

Asmita Sarkar

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