
देश के सबसे पुराने आईआईटी में से एक, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी खड़गपुर में शिक्षकों और प्रशासन के बीच विवाद गहरा गया है। दरअसल, IIT खड़गपुर ने अपने 86 फैकल्टी मेंबर्स को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। वजह यह है कि इन लोगों ने टीचर्स असोसिएशन के पदाधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग वाली याचिका पर साइन किए थे। इसके जवाब में अब फैकल्टी मेंबर्स भी संभावित कानूनी कार्रवाई की सोच रहे हैं। साथ ही सड़क पर प्रदर्शन और भूख हड़ताल सहित विरोध प्रदर्शन की योजना भी बना रहे हैं।
दरअसल, आईआईटी-खड़गपुर प्रशासन और आईआईटी-खड़गपुर टीचर्स एसोसिएशन (IITTA) के बीच संघर्ष सितंबर में शुरू हुआ था, जब एसोसिएशन ने कई शिकायतों को रेखांकित करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को एक पत्र भेजा था। पत्र में यह कहा गया था कि पिछले पांच वर्षों में संस्थान में “अभूतपूर्व भाई-भतीजावाद ” देखने को मिला है, जिससे “संस्थान की प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा है। इसके जवाब में आईआईटी-खड़गपुर प्रशासन ने आईआईटीटीए के पदाधिकारियों- अध्यक्ष, महासचिव, उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष-को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। प्रशासन के इस फैसले से तनाव और बढ़ गया है। खासकर, एक ऐसे वक़्त में जब जनवरी 2025 से संस्थान को नया निदेशक मिलने वाला है।
टीचर्स एसोसिएशन का कहना है कि ‘IITTA एक स्वतंत्र निकाय है, जो पश्चिम बंगाल सोसायटी अधिनियम के तहत पंजीकृत है. प्रशासन एक स्वतंत्र संघ के निर्वाचित सदस्यों के खिलाफ और अब उनका समर्थन करने वाले 86 शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई कैसे कर सकता है?’ IITTA अब किसी भी अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए कानूनी विकल्प तलाश रहा है। यहाँ तक कि एक फैकल्टी ने कहा, “हम काम पर काली पट्टियां पहनेंगे, सड़क पर विरोध प्रदर्शन करेंगे; हममें से कुछ लोग भूख हड़ताल भी शुरू कर सकते हैं।”
मौजूदा प्रशासन के साथ मतभेदों के कारण ही IITTA के पदाधिकारियों ने 20 सितंबर को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को पत्र भेजा था। उनका आरोप था कि प्रशासन फैकल्टी की शिकायतों का समाधान नहीं कर रहा है। अपने पत्र में आईआईटीटीए ने आईआईटी खड़गपुर के निदेशक वी.के. तिवारी, जिनका कार्यकाल जनवरी 2025 में खत्म हो रहा है, उन पर “भाई-भतीजावाद”, “मनमाने ढंग से फैकल्टी भर्ती”, “मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल और बाहरी परिसर शुरू करने में विफलता” और “कैंपस और पड़ोस समुदाय के बीच सद्भाव को खराब करने” का आरोप लगाया था।
शिक्षक संघ ने तब कहा था कि संस्थान को एक ऐसे निदेशक की जरूरत है जो सभी हितधारकों और खासतौर से फैकल्टी मेंबर्स के प्रति “दयालु हो और जरूरतों और आकांक्षाओं को सुनता हो।” उस पत्र के लगभग दो महीने बाद, आईआईटी खड़गपुर के रजिस्ट्रार ने 12 नवंबर को IITTA के पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिसमें उन्हें 20 सितंबर 2024 को शिक्षा मंत्रालय को लिखे अपने पत्र में लगाए गए आरोपों के सबूत सात दिनों के भीतर जमा करने को कहा गया।
नोटिस में यह कहा गया कि “निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक स्पष्टीकरण या प्रतिक्रिया” प्रदान करने में विफलता के कारण आगे की कार्रवाई हो सकती है, जिसमें संस्थान के नियमों के अनुसार अनुशासनात्मक उपाय शामिल हो सकते हैं। दो दिन बाद, 14 नवंबर को, IITTA के निर्वाचित सदस्यों ने यह कहते हुए समय सीमा 26 दिसंबर तक बढ़ाने का अनुरोध किया कि वे चल रहे सेमेस्टर के लिए शैक्षणिक गतिविधियों में व्यस्त थे। हालांकि, उनके अनुरोध को तुरंत अस्वीकार कर दिया गया। इस बीच, प्रशासन ने समय पर कारण बताओ जवाब देने में विफल रहने के लिए IITTA पदाधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक जांच शुरू कर दी।
अनुशासनात्मक कार्रवाई और कारण बताओ नोटिस को वापस लेने की मांग करते हुए एक ज्ञापन के साथ मिनट्स प्रसारित किए गए थे, जिस पर 86 शिक्षकों ने साइन किए थे जो IITTA के सदस्य भी थे। इस पर प्रतिक्रिया करते हुए, रजिस्ट्रार ने 29 नवंबर को सभी 86 शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया कि उनके कृत्य ने संस्थान के आचरण नियमों, क़ानून 15 (17) का उल्लंघन किया है। IIT खड़गपुर प्रशासन द्वारा अपने 86 फैकल्टी मेंबर्स को कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद शिक्षकों और प्रशासन के बीच विवाद और बढ़ गया है।




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