
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में एलाइड हेल्थ साइंसेज (एएचएस) के 47 इंटर्न छात्र स्कॉलरशिप की मांग को लेकर पिछले लगभग हफ्ते भर से हड़ताल पर हैं। इसी क्रम में छात्रों ने स्टाइपेंड, इंटर्नशिप और पंजीकरण प्रक्रियाओं के संबंध में संस्थान की नीतियों को लेकर अपना असंतोष जताते हुए डीन कार्यालय के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांग पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है, तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी।
सफेद कोट पहने प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां ले रखी थीं जिन पर “हमारे प्रयासों को समझें, हमारे श्रम का सम्मान करें”, “इंटर्न इच्छा से, बल से नहीं” आदि बातें लिखी हुई थीं। उन्होंने “स्टाइपेंड नहीं, काम नहीं” और “एएचएस के लिए न्याय” जैसे नारे भी लगाए। उनकी प्रमुख मांगों में उनके काम के लिए उचित स्टाइपेंड, इंटर्नशिप को गैर-अनिवार्य बनाना शामिल है ताकि छात्र सरकारी नौकरियों और उच्च अध्ययन जैसे करियर के अवसरों का लाभ उठा सकें। साथ ही उन्होंने स्पष्ट लिखित दिशा-निर्देश जारी कर पंजीकरण प्रक्रिया से संबंधित मुद्दों को हल करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने इस बात पर जोर देते हुए कि उनके योगदान को मान्यता और उचित मुआवजा मिलना चाहिए, कहा कि एक स्पष्ट स्टाइपेंड नियम की अनुपस्थिति उनकी वित्तीय स्थिरता और मनोबल को प्रभावित करता है। विश्वविद्यालय प्रशासन को संबोधित एक पत्र में, छात्रों ने संवाद के महत्व और अपनी शिकायतों के त्वरित समाधान पर जोर दिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि विरोध शांतिपूर्ण रहेगा। साथ ही प्रशासन से उन्होंने अपनी चिंताओं को गंभीरता से लेने का आग्रह किया।
बता दें कि एम्स ऋषिकेश में उत्तराखंड समेत विभिन्न प्रदेशों के छात्र- छात्राएं एएचएस कोर्स में इंटर्नशिप कर रहे हैं। छात्रों की मानें तो इंटर्नशिप में स्कॉलरशिप दिए जाने का प्रावधान है। देश के अन्य एम्स में यह स्कॉरशिप छात्रों को सभी कोर्स के लिए दी जा रही है। छात्रों का आरोप है कि एम्स ऋषिकेश में महज चार कोर्स के लिए ही इंटर्न को स्कॉलरशिप दी जाती है।
छात्रों का कहना है कि इस बाबत एम्स की कार्यकारी निदेशक और डीन एकेडमिक से कई दौर की वार्ता हो चुकी है, जिसमें अभी तक एम्स प्रशासन सभी कोर्स के लिए स्कॉलरशिप प्रदान करने के लिए राजी होने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने बताया कि इससे कुल 47 छात्र-छात्राएं प्रभावित हैं, जिसमें उत्तराखंड, यूपी, बिहार, राजस्थान, केरल, दिल्ली समेत अन्य प्रदेशों के छात्र-छात्राएं शामिल हैं।




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