
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इतिहास में कुछ लोगों के योगदान को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने और कई स्वतंत्रता सेनानियों को भुला देने पर निराशा जताई है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की इतिहास की किताबों में स्वतंत्रता संग्राम के कुछ नायकों के साथ अन्याय हुआ है, क्योंकि स्वतंत्रता के बाद की कहानियों में हेरफेर करके केवल चुनिंदा व्यक्तियों को श्रेय दिया गया। उन्होंने कहा कि भावी पीढ़ियों में देशभक्ति की भावना जगाने के लिए बिना किसी लाग-लपेट के ऐतिहासिक विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
राजा महेंद्र प्रताप की 138वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश अपने इतिहास को उन लोगों को ‘कृपालु, चाटुकार, श्रेय देकर पोषित नहीं कर सकता, जिन्होंने निश्चित रूप से भूमिका निभाई, लेकिन दूसरों ने जो भूमिका निभाई, उसे नहीं। हम अपने नायकों को छोटा नहीं होने दे सकते। उपराष्ट्रपति धनखड़ ने राजा महेन्द्र प्रताप सिंह की तारीफ करते हुए उन्हें एक कुशल राजनीतिज्ञ, दूरदर्शी और राष्ट्रवादी बताया।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा, हमारे इतिहास के साथ छेड़छाड़ की गई है, कुछ लोगों का एकाधिकार बनाया गया है, जिन्हें हमें आजादी दिलाने का श्रेय दिया जाता है। यह हमारी अंतरात्मा पर असहनीय दर्द है। यह हमारी आत्मा और दिल पर बोझ है। उन्होंने कहा कि यह न्याय का उपहास है कि हम महेंद्र प्रताप जैसे महान पुरुषों के ऐसे वीरतापूर्ण कार्यों को पहचानने में “बुरी तरह विफल” रहे हैं। उन्होंने कहा, यदि आप हमारी स्वतंत्रता की नींव को देखें, तो हमें बहुत अलग तरीके से पढ़ाया गया है। हमारी स्वतंत्रता की नींव राजा महेंद्र प्रताप सिंह और अन्य गुमनाम नायकों या कम प्रसिद्ध नायकों जैसे लोगों के सर्वोच्च बलिदानों पर बनी है।




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