
ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय के सुनाबेड़ा परिसर में ओपन एक्सेस पब्लिशिंग पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग ने आईआईटी दिल्ली के केंद्रीय पुस्तकालय के सहयोग से किया। ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चक्रधर त्रिपाठी ने कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस अवसर पर ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय के अकादमिक एवं प्रशासनिक सलाहकार प्रो. विभाष चंद्र झा, आईआईटी दिल्ली के लाइब्रेरियन डॉ. नबी हसन, आईआईटी दिल्ली के सहायक लाइब्रेरियन डॉ. मोहित गर्ग और जेएमसी विभागाध्यक्ष एवं कार्यशाला के संयोजक डॉ. निखिल कुमार गौड़ा भी मौजूद थे।
अपने संबोधन में प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि शोध हमेशा उच्च गुणवत्ता वाला होना चाहिए तथा उच्च गुणवत्ता वाले प्रकाशन आज आवश्यक है। हमें पश्चिमी सिद्धांतों का अनुसरण करने के बजाय भारतीय पद्धति के आधार पर अपने प्रकाशनों को बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे प्रकाशन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिखाई देने चाहिए, ताकि भारत को अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक क्षेत्र में सकारात्मक रूप से पेश किया जा सके। शैक्षणिक गुणवत्ता को पुनर्जीवित करने तथा पृथ्वी को पुनर्जीवित करने के लिए आत्म-प्रक्षेपण की आवश्यकता है।
डॉ. हसन ने अपने उद्बोधन में ओआरसीआईडी के उद्देश्य तथा कार्यों को समझाया। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले प्रकाशनों को बनाए रखने के लिए ओपन रिसर्चर एंड कंट्रीब्यूटर आईडी (ओआरसीआईडी) आवश्यक है। ओडिशा प्रतिभाओं से समृद्ध है तथा ओडिशा के शिक्षाविदों को अच्छे प्रकाशनों के माध्यम से अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करना चाहिए। डॉ. गर्ग ने कहा कि हमारे पास ज्ञान तो है, लेकिन इसे समाज तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
प्रो. झा ने समाज में सकारात्मक नैतिकता को बनाए रखने के लिए युवा शिक्षाविदों द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले प्रकाशनों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सूचना तथा डिजिटलीकरण के युग में प्रत्येक प्रकाशन की जानकारी समाज को होनी चाहिए। डॉ. निखिल कुमार गौड़ा ने स्वागत भाषण दिया तथा कार्यशाला के उद्देश्य से अवगत कराया। कार्यशाला के सह-संयोजक डॉ. प्रदोष कुमार रथ ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
दो दिवसीय कार्यशाला में शोध प्रकाशन, अच्छी गुणवत्ता वाली पत्रिकाएँ, ओपन एक्सेस प्रकाशन और संबंधित विषयों से संबंधित तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। कार्यशाला का संचालन आईआईटी दिल्ली के डॉ. नबी हसन, डॉ. मोहित गर्ग और सेंट्रल ट्राइबल यूनिवर्सिटी, आंध्र प्रदेश के डॉ. डी. नारायण ने संसाधन पुरुषों के रूप में किया। कार्यशाला में विभिन्न संस्थानों के संकाय सदस्यों के साथ-साथ ओड़िशा केंद्रीय विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों और विश्वविद्यालय के शोध विद्वानों सहित 70 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।




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