
पिछले दिनों गूगल ने अपने नवीनतम क्वांटम प्रोसेसर, ‘विलो’ का अनावरण किया। यह चिप कंप्यूटिंग क्षेत्र में एक विशाल छलांग मानी जा रही है, और ऐसा माना जा रहा है कि यह कंप्यूटिंग के भविष्य को और उसके इस्तेमाल को हमेशा के लिए बदल कर रख देगा। गूगल के शोधकर्ताओं ने इस चिप को पहली ‘सीमा से नीचे’ क्वांटम गणना प्रदर्शित करने में सक्षम बनाया है। गूगल के अनुसार विलो चिप में सही त्रुटि-सुधार तकनीकों के साथ, क्वांटम कंप्यूटर बढ़ती सटीकता के साथ गणना कर सकते हैं क्योंकि उन्हें बढ़ाया जाता है – इस सुधार की दर एक महत्वपूर्ण सीमा से अधिक है। विलो में 105 भौतिक क्विबिट्स हैं और इसे Google 2021 से सांता बारबरा, कैलिफोर्निया में अपने क्वांटम-कंप्यूटिंग परिसर में बना रहा है।
चिप क्वांटम कंप्यूटर के साथ दो प्रमुख समस्याओं का समाधान करती है जैसा कि हम आज उन्हें जानते हैं। सबसे पहले, Google का दावा है कि विलो क्वांटम कंप्यूटिंग त्रुटियों को “तेजी से” कम कर सकता है। क्वांटम कंप्यूटर, जैसा कि माइक्रोसॉफ्ट के एज़्योर क्वांटम बताते हैं, परंपरागत कंप्यूटरों की तुलना में त्रुटियों के लिए अधिक प्रवण हैं।
क्वांटम कंप्यूटिंग गणना करने की ऐसी तकनीक है, जो परंपरागत कंप्यूटर से काफी अलग है। आज हम जो कंप्यूटर देखते हैं, वह बाइनरी गणना का इस्तेमाल करते हैं, यह “बिट्स” पर काम करते हैं, जो या तो 1 या 0 हो सकते हैं। मतलब जो भी जानकारी हमारे सामने होती है, वह दरअसल 1 या 0 के रूप में होती है, और कंप्यूटर उसे लॉजिक का इस्तेमाल करके उस जानकारी को मानव द्वारा पढ़ने और समझने लायक बनाता है। अगर हम क्वांटम कंप्यूटर की बात करें तो वह क्यूबिट्स पर काम करता है। ये क्यूबिट्स एक साथ 1 और 0 दोनों पर काम कर सकता है। एक क्यूबिट दो अवस्थाओं के रैखिक संयोजन को प्राप्त करने के लिए सुपरपोजिशन की क्वांटम मैकेनिकल घटना का उपयोग करता है, और जानकारी को बेहद काम समय में प्रोसेस कर देता है।
इसके अतिरिक्त दो या दो से ज़्यादा qubits एक दूसरे से जुड़ सकते हैं, इसे entanglement कहते हैं। इसका अर्थ है की एक qubit का state दूसरे qubit पर निर्भर कर सकता है। Quantum computer qubits की सहायता से बड़ी और जटिल समस्याओं को कुशलता और तेजी से हल किया जा सकता है। Qubits की superposition और entanglement करने की क्षमता के कारण Quantum computer को parallel computation करने की शक्ति मिलती है, जो परंपरागत कंप्यूटर के लिए असंभव होता है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि क्वांटम कंप्यूटरों को अधिक शक्तिशाली होने के लिए अधिक qubits की आवश्यकता होती है – लेकिन अधिक qubits का अर्थ अधिक त्रुटियां भी हैं। इस त्रुटि मुद्दे से निपटना लंबे समय से क्वांटम कंप्यूटिंग क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रहा है, और गूगल का विलो चिप इसी समस्या का निवारण करता है। विलो में हम जितने अधिक qubits का उपयोग करते हैं, उतना ही हम त्रुटियों को कम करते हैं, और सिस्टम उतना ही अधिक क्वांटम बन जाता है।
क्वांटम कंप्यूटर एक परंपरागत कंप्यूटर से कहीं ज्यादा तेज़ होता है, क्योंकि वह parallel computation कर सकता है। इसका अर्थ है कि वह बहुत ही काम समय में कई प्रकार के कार्यों को अंजाम दे सकता है। एक क्वांटम कंप्यूटर किसी भी परंपरागत कंप्यूटर से कहीं ज्यादा कुशल होता है, क्योंकि वह कई प्रकार के संसाधनों का उचित तरीके से उपयोग करता है। इसका अर्थ ये है कि क्वांटम कंप्यूटर बहुत ही कम मेमोरी, पावर और स्पेस का इस्तेमाल करता है और इतने भी ही वह व्यापक तरीके के कार्य कर सकता है, जो एक परंपरागत कंप्यूटर के लिए असंभव है। क्वांटम कंप्यूटर अपनी गणनाओं में किसी भी परंपरागत कंप्यूटर से ज्यादा कहीं ज्यादा एक्यूरेट होता है, क्योंकि वह अपनी गणना में त्रुटि सुधार कर सकता है। इसका अर्थ है कि वो अपने qubits के states को लगातार monitor करता है और जैसे ही कोई त्रुटि होती है तो वह उसे तुरंत सुधार देता है। यह किसी भी परंपरागत कंप्यूटर के लिए असंभव होता है।
क्वांटम कंप्यूटिंग का बहुत कई फ़ील्ड्स और इंडस्ट्रीज में अनुप्रयोग है और भविष्य में यह कई दुनिया को बदल कर रख देने की क्षमता रखता है। क्वांटम कंप्यूटिंग से एन्क्रिप्शन और डेक्रिप्शन के प्रोसेस में तरीकों में सुधार किया जा सकता है। इसकी सहायता से डाटा सिक्योरिटी और गोपनीयता को बेहतर किया जा सकता है। क्वांटम क्रिप्टोग्राफ़ी का उपयोग करके डिजिटल संचार और कुंजी वितरण को सुरक्षित बनाया जा सकता है। क्वांटम कंप्यूटिंग से मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग के अल्गोरिथम को सुधारा जाता है, अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में असाधारण बदलाव ला सकता है। क्वांटम मशीन लर्निंग का उपयोग करके डाटा एनालिसिस, डाटा ऑप्टिमाइजेशन और वर्गीकरण, और पैटर्न रिकग्निशन को आसान किया जा सकता है।
क्वांटम कंप्यूटिंग से रासायनिक प्रणालियों और मॉलिक्यूलर मॉडल को सुधारा जा सकता है, जो रसायन शास्त्र और मेडिकल क्षेत्र में क्रांति ला सकता है। क्वांटम केमिस्ट्री का उपयोग करके जटिल बीमारियों के लिए दवा की जल्दी खोज की जा सकती है। इसके अतिरिक्त मटेरियल डिज़ाइन, कटैलिसीस और रिएक्शन काइनेटिक्स जैसी प्रक्रियाओं को उन्नत किया जा सकता है। क्वांटम कंप्यूटिंग की सहायता से बेहद जटिल भौतिक घटनाओं का अध्ययन किया जा सकता है, भौतिकी के सिद्धांतों को बेहद सरलता से समझा जा सकता है। क्वांटम भौतिकी का उपयोग करके क्वांटम मैकेनिक्स, क्वांटम फील्ड थ्योरी, क्वांटम ग्रेविटी और और ब्रह्मांड विज्ञान किया जा सकता है।
जैसा कि हमने पढ़ा कि क्वांटम कंप्यूटिंग का इस्तेमाल जटिल समस्याओं को हल करने में हो सकता है, इसे भविष्य की तकनीक माना जा रहा है। Google का मानना है कि विलो चिप द्वारा टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नए आयाम प्राप्त करने सफलता मिलेगी, विशेष रूप से नई टेक्नोलॉजी से- हेल्थकेयर, एनर्जी और अन्य सेक्टर्स में रिसर्च को बेहतर कर, आम आदमी के लिए नए रास्ते खोलेगा। क्वांटम कंप्यूटिंग में AI और चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में क्रांति लाने की अपार संभावनाएं हैं और पूरी आशा है कि अब अन्य टेक्नोलॉजी कंपनियां भी क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में कार्य करेंगी और नए तरह के समाधान पेश करेंगी।




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