
दिल्ली स्टार्टअप कैपिटल बन गई है और आईआईटी दिल्ली स्टार्टअप्स का हब। आईआईटी दिल्ली के निकले स्टूडेंट्स देश-विदेश में कई स्टार्टअप्स चला रहे हैं।
भारत की 200 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से करीब एक तिहाई के संस्थापक आईआईटी के पूर्व छात्र हैं। यह जानकारी Hurun India और IDFC First Bank द्वारा किए गए एक संयुक्त अध्ययन से सामने आई है। इस स्टडी के अनुसार 388 संस्थापकों में से लगभग 130 आईआईटी के छात्र हैं जो 2000 के बाद स्थापित कंपनियों के संस्थापक बने हैं।
आईआईटी दिल्ली जो भारतीय स्टार्टअप दुनिया के सितारे सचिन और बिन्नी बंसल जैसे बड़े नामों की alma mater हैं, इस लिस्ट में सबसे आगे है। यहां से 36 संस्थापकों ने स्नातक किया है। इसके बाद आईआईटी बॉम्बे के 20 और आईआईटी खड़गपुर के 19 छात्र हैं, जिन्होंने अपने-अपने स्टार्टअप्स को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
इन आईआईटी छात्रों की तरफ से स्थापित स्टार्टअप्स की कुल मूल्यांकन राशि लगभग 20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है जो इस क्षेत्र में उनकी सफलता और प्रभाव को रेखांकित करती है। जोमेटो के सह-संस्थापक और सीईओ दीपिंदर गोयल, जो आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र हैं, इस लिस्ट में दूसरे स्थान पर हैं।
लिस्ट में डीमार्ट के राधाकृष्णन दमानी पहले स्थान पर हैं। जोमेटो जो 2021 में अपने सार्वजनिक शेयरों के लिए एक अत्यधिक सफल आईपीओ में लिस्ट हुआ था, अब 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के बाजार मूल्य के साथ खड़ा है। इसके अलावा पॉलिसीबाजार के संस्थापक यशिश दहिया रेजरपे के सह-संस्थापक हर्षिल माथुर और शशांक कुमार जैसे आईआईटी के पूर्व छात्रों ने भी अपनी कंपनियों की सफलता से खुद को एक मजबूत नाम बना लिया है।
आईआईटी से निकलने वाले युवा अब सिर्फ नौकरी करने वाले नहीं बल्कि दुनिया के सबसे बड़े उद्यमियों में अपनी पहचान बना रहे हैं। यही नहीं आईआईटी द्वारा संचालित इन्क्यूबेशन केंद्र भी स्टार्टअप्स को बढ़ावा दे रहे हैं। आईआईटी मद्रास का इन्क्यूबेशन सेल 2023 में 351 डीप टेक स्टार्टअप्स के पोर्टफोलियो के साथ 45,000 करोड़ रुपये के मूल्यांकन तक पहुंच गया।




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