
राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों के आधार पर एनटीए में कई बदलाव होने वाले हैं। एनटीए के परीक्षा कराने के तरीके में आने वाले समय में कई बदलाव दिखेंगे। इसकी तैयारी एकदम युद्धस्तर पर की जाएगी। एनटीए देशभर में सरकारी शिक्षण संस्थानों में चरणबद्ध तरीके से स्टैंडर्ड टेस्टिंग सेंटर बनाएगी। इसे वार-फुटिंग थीम का नाम दिया गया है, ताकि सुरक्षा, पारदर्शिता, जिम्मेदारी में किसी प्रकार का समझौता न हो।
एनटीए ने सभी आईआईटी, एनआईटी, केवी, नवोदय विद्यालयों के अलावा राज्य सरकारों के सरकारी कॉलेजों, तकनीकी कॉलेजों में सेंटर बनाने के लिए पत्र लिखा है। इसमें उनसे सहयोग की मांग की गई है। सेंटर बनाने में एनटीए की तरफ से मदद की जाएगी। इसमें 500 से 1000 छात्रों के एक साथ बैठने की व्यवस्था होगी। राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं के लिए किस स्कूल या कॉलेज को सेंटर बनाना है, इसका फैसला उस जिले का डीएम करेगा। इसकी जांच में राज्य सरकार और पुलिस भी सहयोग करेगी।
आम छात्रों के साथ-साथ दिव्यांग वर्ग के छात्रों की दिक्कतों को ध्यान में रखकर अलग से भी सेंटर बनाए जाएंगे। प्रश्न पत्रों, सेंटर की सुरक्षा का इंतजाम के लिए पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती होगी। कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं के सेंटर चिह्नित होने के बाद एनआईसी और एनटीए की टीम दौरा करके जांच करेंगी। हर जिले में परीक्षाओं की निगरानी के लिए सीसीटीवी मॉनिटरिंग सेंटर बनाए जाएंगे।
अभी तक एनटीए हैडक्वार्टर दिल्ली से निगरानी होती थी। इस रिकार्डिंग की डीवीआर एनटीए के पास सुरक्षित रहेगी। समिति ने हिमाचल प्रदेश, उत्तराखड़, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख यानी उत्तरी हिमालयन राज्य के अलावा अंडमान निकोबार द्वीप समूह और उत्तर-पूर्वी राज्यों में मोबाइल टेस्टिंग सेंटर बनाने की सिफारिश है। दरअसल, यहां कई इलाके ऐसे हैं, जहां 15 से 50 छात्र परीक्षा देने वाले होते हैं। परीक्षा केंद्रों पर निगरानी के लिए पुलिस के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों की भी तैनाती की जाएगी।
एनटीए को किसी भी परीक्षा के कम से कम तीन सेट बनाने होंगे। एक सेट हमेशा बैकअप में होगा। इसमें अलग-अलग सेट में एक ही प्रश्न अलग-अलग नंबर से होगा। प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट को एक अलग कोड वर्ड में सील किया जाएगा।
प्रश्नपत्र प्रिटिंग वाली जगह सीसीटीवी निगरानी रहेगी। यहां सिर्फ एनटीए के वरिष्ठ अधिकारी जाएंगे। यदि प्रश्न-पत्र ट्रांसपोर्ट से भेजे जाते हैं तो उसकी टाइम-लाइन सीसीटीवी से लाइव निगरानी होगी। चुनाव आयोग की तर्ज पर परीक्षा केंद्रों पर प्रिसाइडिंग ऑफिसर तैनात होंगे। प्रश्नपत्र खोलने के समय एनटीए अधिकारी, एनआईसी अधिकारी, संबंधित सेंटर हेड, प्रिसाइडिंग ऑफिसर की मौजूदगी में खुलेंगे।
एनटीए डीजी अब एजेंसी का सीईओ होगा। यह पद केंद्र सरकार के अतिरिक्त सचिव पद का होगा। परीक्षाओं की जिम्मेदारी के लिए निदेशक स्तर पर 10 नए पद सृजित किए जा रहे हैं। इसमें दो एडीजी होंगे, जिसमें एक एडीजी पर टेक्नोल, प्रोडेक्ट और ऑपरेशन तो दूसरे एडीजी पर सिक्योरिटी और सर्विलांस की जिम्मेदारी होगी।
एनटीए को आईआईटी जेईई एडवांस की तर्ज पर रिजल्ट की तिथि-समय की जानकारी पहले देनी होगी। एनटीए की रिजल्ट में लेटलतीफी नहीं चलेगी। छात्रों ने कमेटी से इसकी शिकायत की थी। इसी के आधार पर प्रमुख सिफारिशों के तहत शिक्षा मंत्रालय ने एनटीए को रिजल्ट जारी करने की सही डेट और टाइम देने का निर्देश दिया है। इसे लागू करना अनिवार्य रहेगा।




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