
पटना पुलिस ने सोमवार सुबह चार बजे जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर को गिरफ्तार कर लिया। पीके बीपीएससी की 70वीं प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करवा री-एग्जाम की मांग लेकर दो जनवरी से आमरण अनशन पर बैठे थे। पटना जिला प्रशासन का कहना है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में गैर-कानूनी ढंग से धरना देने के लिए यह कार्रवाई की गई है। पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान गांधी मैदान में प्रशांत किशोर के साथ सैकड़ों छात्र और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी अरविंद ठाकुर भी मौजूद थे।
जनसुराज की ओर से बताया गया है कि प्रशांत किशोर को आज सुबह पुलिस आमरण अनशन से हिरासत में ले गई और पिछले पांच-छह घंटे से उन्हें पटना के आसपास घुमा रही है। पुलिस उन्हें एम्स में एडमिट नहीं करा पाई। सुबह साढ़े नौ बजे तक पुलिस उनका मेडिकल जांच भी नहीं करा पाई है और उन्हें एंबुलेंस में लेकर घूमती रही।
जनसुराज पार्टी की ओर से बताया गया है कि सोमवार अहले सुबह करीब चार बजे पुलिस ने जबरन प्रशांत किशोर को उठाया और उन्हें थप्पड़ भी मारा।
जनसुराज के सूत्रधार और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर गिरफ्तारी के बाद भी अपना आमरण अनशन जारी रखेंगे। यह बात खुद प्रशांत किशोर ने कही है। उन्होंने कहा कि वह अपना इलाज लेने से मना चुके हैं और अपना आमरण अनशन जारी रखेंगे।
गौरतलब है कि अनशन के दौरान प्रशांत किशोर का लगातार चेकअप किया जा रहा था। इस दौरान उन्होंने खुद यह स्पष्ट किया था कि उन्हें थोड़ी खांसी और एलर्जी है। इसके अलावा उन्हें कोई गंभीर दिक्कत नहीं है और वह अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं। बता दें, पटना जिला प्रशासन ने पीके से अनशन खत्म करने की अपील की थी, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। पीके पर आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें और उनके समर्थकों को गांधी मैदान से हटकर धरना के लिए निर्धारित स्थल गर्दनीबाग में जाने के लिए नोटिस दिया था। प्रतिबंधित क्षेत्र में गैर कानूनी ढंग से धरना देने के कारण गांधी मैदान थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। प्रशासन द्वारा कई बार आग्रह करने और पर्याप्त समय देने के बाद भी जगह खाली नहीं किये जाने के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की है।
बता दें, 13 दिसंबर 2024 को पटना के बापू भवन परीक्षा केंद्र पर 70वीं बीपीएससी परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक होने की अफवाह फैलने के बाद परीक्षा को लेकर विवाद खड़ा हुआ। इसके चलते कई छात्रों ने परीक्षा का बहिष्कार किया। बीपीएससी ने बापू भवन में दोबारा परीक्षा आयोजित करने का आदेश दिया, लेकिन छात्रों ने पूरी परीक्षा रद्द करने की मांग के साथ विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।




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