
OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने खुलासा किया है कि 2025 तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एजेंट इंसानों के साथ मिलकर काम करना शुरू कर सकते हैं। यह बात उन्होंने अपने एक ब्लॉग पोस्ट में कही जहां उन्होंने AI की तेज़ी से हो रही प्रगति और इसके भविष्य में दुनिया पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा की। ऑल्टमैन का कहना है कि AI एजेंट्स के आने से कंपनियों की कार्यक्षमता और उत्पादकता में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस तकनीक के आने से नौकरियों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
ऑल्टमैन ने कहा कि आने वाले समय में AI सिर्फ एक सहायक टूल नहीं रहेगा बल्कि यह इंसानों की तरह सोचने और फैसले लेने में सक्षम होगा। इसे “आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI)” कहा जाता है। यह तकनीक दफ्तरों में कई काम तेजी और सटीकता से करेगी जो अभी इंसानों द्वारा किए जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि AI के आने से बड़े पैमाने पर छंटनी हो सकती है। उदाहरण के लिए जिन कार्यों में नियमित डेटा एंट्री, रिपोर्ट बनाना या कोई भी ऐसा काम है जो नियमों के आधार पर किया जाता है उसे AI बहुत आसानी से संभाल सकता है। इससे लाखों लोगों की नौकरियों पर खतरा मंडरा सकता है।
ऑल्टमैन ने बताया कि OpenAI जल्द ही इंसानों जैसी सोच रखने वाली तकनीक पर काम पूरा कर सकता है। यह तकनीक न सिर्फ काम को समझेगी बल्कि फैसले लेने में भी सक्षम होगी। यह दफ्तरों के कामकाज को पूरी तरह से बदल सकती है।
हालांकि इसका एक दूसरा पहलू यह भी है कि AI की वजह से कर्मचारियों पर अधिक दबाव आ सकता है। इससे उन्हें खुद को बेहतर और ज्यादा उत्पादक साबित करना पड़ेगा।
दूसरी तरफ ऑल्टमैन ने इस बात पर जोर दिया कि AI इंसानों की नौकरियां छीनने के बजाय उनके काम को बेहतर बनाएगा। उदाहरण के लिए ChatGPT जैसे टूल्स लोगों की प्रोडक्टिविटी को बढ़ाएंगे।
वहीं उन्होंने कहा, “AI इंसानों के सहायक की तरह काम करेगा जिससे लोगों को अपने रचनात्मक और मुश्किल कामों पर फोकस करने का ज्यादा समय मिलेगा। AI उन कार्यों को तेजी से निपटाएगा जो समय और मेहनत लेते हैं।”
ऑल्टमैन ने विश्वास जताया कि AI लोगों के लिए नए अवसर भी पैदा करेगा। यह उन्हें नई तकनीकों और विचारों को अपनाने का मौका देगा।
AGI यानी आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस AI का ऐसा रूप है जो इंसानों की तरह सोचने, समझने और फैसले लेने की क्षमता रखता है।
ऑल्टमैन की राय में AI का सही इस्तेमाल इसे वरदान बना सकता है। अब यह हमारे ऊपर है कि हम इस तकनीक को कैसे अपनाते हैं।




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