
महिला प्रोफेसर अब बच्चे की देखभाल के लिए दो साल तक चाइल्ड केयर के नाम पर छुट्टी ले सकती हैं। उच्च शिक्षण संस्थान छुट्टी देने में आनाकानी नहीं कर सकेंगे।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने चाइल्ड केयर के प्रावधान को यूजीसी रेग्यूलेशन 2025 में शामिल किया है। यदि कोई उच्च शिक्षण संस्थान नियम का पालन नहीं करता है तो डीबार भी हो सकता है। वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, कई बार महिला प्रोफेसर इस मुद्दे पर शिकायत करती थीं, जबकि यह उनके अधिकार क्षेत्र में आता है। इन्हीं दिक्कतों को देखते हुए यूजीसी ने इसे नए नियमों में शामिल किया है।
यूजीसी रेग्यूलेशन 2025 में साफ लिखा है कि यदि कोई नियमों का उल्लंघन करता है तो संबंधित उच्च शिक्षण संस्थान के खिलाफ आयोग सख्त कार्रवाई कर सकता है। इसमें किसी डिग्री प्रोग्राम में दाखिले पर रोक, जुर्माना, संबंधित कोर्स की मान्यता वापस लेने से लेकर संबंधित संस्थान की डीबार करना आदि शामिल है।
बता दें कि हाल ही में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने राजस्थान के तीन विश्वविद्यालयों पर अगले पांच वर्षों तक पीएचडी पाठ्यक्रम शुरू करने से रोक लगा दी है। अधिकारियों के अनुसार, इन विश्वविद्यालयों में डिग्री की अखंडता से समझौता किया गया है। यूजीसी ने ओपीजेएस विश्वविद्यालय, चूरू; सनराइज विश्वविद्यालय, अलवर और सिंघानिया विश्वविद्यालय, झुंझुनू पर यह प्रतिबंध लगाया है।




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