
अब दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) के विद्यार्थियों को पाठ्य सामग्री (किताबें व नोट्स) पार्सल से मिलेगी। पार्सल कहां तक पहुंचा है और कब तक मिलेगा, इसको विद्यार्थी ट्रैकिंग आईडी से ट्रैक भी कर सकेंगे। एसओएल ने छात्रों को यह सुविधा देने के लिए डाक विभाग से करार किया है। आवासीय पता गलत होने पर पार्सल वापस एसओएल पहुंच जाएगा। अब तक एसओएल के तीनों सेंटरों पर पाठ्य सामग्री अपवाइंटमेंट के माध्यम से दी जाती है।
एसओएल में यूजी स्तर पर ही करीब डेढ़ लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। दाखिले के समय और नया सेमेस्टर शुरु होने पर विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए पाठ्यसामग्री दी जाती है। तीनों सेंटरों पर प्रतिदिन दो से ढाई हजार विद्यार्थियों को अपाइंटमेंट पर बुलाया जाता है, जहां उन्हें पाठ्य सामग्री दी जाती है।
स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग की निदेशक प्रो. पायल मागो ने बताया कि पॉयलट प्रोजेक्ट के रूप में पार्सल से पाठ्य सामग्री को भेजने की व्यवस्था को शुरू किया जा रहा है। बुधवार (23 जनवरी) को एक कार्यक्रम में इसे लॉन्च किया जाएगा। इसकी शुरूआत ऑनर्स के विद्यार्थियों से की जा रही है। प्रो. मागो ने बताया कि 2022-23, 2023-24, और 2024-25 के ऑनर्स विद्यार्थियों को पार्सल भेजा जाएगा। स्पीड पोस्ट व पार्सल की तरह विद्यार्थी इसे ट्रेक भी कर सकेंगे। इससे उन्हें पता चल जाएगा कि उनकी पाठ्यसामग्री कहां तक पहुंची है। इससे उन्हें सेंटर पर आकर सामग्री लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी और समय की बचत होगी।
इस व्यवस्था के तहत ट्रेकिंग आईडी वेबसाइट पर डाल दी जाएगी। जहां विद्यार्थी नाम व रोल नंबर के माध्यम से अपनी आईडी लेकर अपने पार्सल को ट्रेक करेंगे। इस सुविधा का लाभ लेने के लिए विद्यार्थियों को अपने आवासीय पत्ते को वेबसाइट पर अपडेट करने को कहा गया है। इससे पाठ्य सामग्री के गायब होने या नहीं पहुंचने की गुजांइश नहीं रहेगी। पायलट प्रोजेक्ट के सफल रहने पर अगले साल से इसे बाकी प्रोग्राम के लिए भी शुरू कर दिया जाएगा।




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