
दिल्ली से सटे सोनीपत में स्थित अशोका यूनिवर्सिटी में सुरक्षा की नई व्यवस्था को लेकर छात्र और यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन आमने-सामने आ गया है। नाराज छात्रों ने हड़ताल कर दी है और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।दरअसल, यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने कैंपस की सिक्योरिटी को लेकर नए सिरे से कुछ कदम उठाए हैं जिससे छात्रों में काफी नाराजगी है। वे इसे प्राइवेसी में दखल बता रहे हैं। छात्रों ने इसे वापस लेने की मांग की है। अशोका यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जो नए सुरक्षा उपाय लागू किए हैं, उनमें वाहनों की जांच और कैंपस में सिगरेट और शराब लाने पर प्रतिबंध शामिल है।
नए नियम कथित तौर पर 13 जनवरी को यूनिवर्सिटी के ऑपरेशंस के वाइस प्रेसिडेंट द्वारा ईमेल में बताए गए थे। नए उपायों में छात्रों की आवाजाही को दूसरे गेट ( गेट 2) पर ट्रांसफर करना और उनकी जेबों की जांच जैसे कदम शामिल हैं। छात्रों ने इन उपायों को अत्यधिक हस्तक्षेप वाला और ज्यादती बताया है। छात्रों ने लगातार इन्हें वापस लेने की मांग की है। अशोका यूनिवर्सिटी स्टूडेंट गवर्नमेंट (AUSG) ने आरोप लगाया कि छात्रों को बिना किसी पूर्व परामर्श के इस निर्णय के बारे में सूचित किया गया।
घोषणा के कुछ घंटों बाद इसके विरोध में हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। इसमें 1,100 से अधिक हस्ताक्षर प्राप्त हुए हैं। इनमें फैकल्टी सदस्य भी शामिल हैं। यूनिवर्सिटी ने एक बयान में कहा कि ये उपाय कैंपस की सुरक्षा बढ़ाने के लिए लागू किए गए हैं और इन्हें फैकल्टी के साथ परामर्श के बाद लागू किया गया है। यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने कहा, ‘अशोका यूनिवर्सिटी कैंपस में सामान और बैग की जांच के उपाय हमारे छात्रों और कैंपस रेजिडेंट्स की सुरक्षा और कल्याण को बढ़ाने के उद्देश्य से किए गए हैं। ये उपाय फैकल्टी और स्टाफ प्रतिनिधियों के परामर्श से और स्टूडेंट गवर्नमेंट और कैंपस मंत्रालय को शामिल करके लागू किए गए हैं, क्योंकि छात्रों की सुरक्षा और उनका कल्याण हमारे लिए सर्वोपरि है।’
छात्रों ने आरोप लगाया कि 17 जनवरी से लागू हुए इन उपायों में वाहनों के साथ ही परिवार के सदस्यों के सामान की जांच भी शामिल है। छात्रों ने कहा कि कैंपस में आने वाले वाहनों की गहन जांच की गई, जिसमें ग्लव कम्पार्टमेंट्स और सीटों के नीचे की जगह भी शामिल थी। टैक्सी ड्राइवरों और परिवार के सदस्यों के सामान की भी इन स्कैनरों से जांच की गई, जिसके बारे में छात्रों को सूचित नहीं किया गया था। कुछ छात्रों ने दावा किया कि उन्हें अपने व्यक्तिगत सामान, जैसे शैम्पू की बोतलें, जांच के लिए सौंपनी पड़ीं, क्योंकि आशंका थी कि उनका उपयोग शराब ले जाने के लिए किया जा सकता है।




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