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आईआईटी दिल्ली के 67वें स्थापना दिवस पर शोधकार्यो, नवाचारों पर रिपोर्ट जारी; पढ़ाई के साथ शोध बढ़ाने पर फोकस

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर रंगन बनर्जी ने बताया कि पढ़ाई के साथ-साथ शोध व नवाचार पर फोकस कर रहे हैं। आईआईटी दिल्ली के सोनीपत कैंपस के बाद संस्थान के पहले विदेशी कैंपस आईआईटी अबूधाबी में अब नवाचार व शोध को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी।

संस्थान के 67वें स्थापना दिवस के मौके पर वर्ष 2018 से लेकर 2024 तक शोध व नवाचार कार्यों पर आधारित शोध रिपोर्ट 2025 भी जारी की। इसे डीन ऑफ प्लानिंग के प्रोफेसर विवेक बुवा ने तैयार किया है। इसमें 271 से अधिक देश समेत अंतरराष्ट्रीय सहयोगों पर आधारित शोधकार्यो को पेश किया गया है।

स्थापना दिवस कार्यक्रम आईआईटी दिल्ली कैंपस में आयोजित किया गया। प्रोफेसर बनर्जी ने बताया कि इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस का दर्जा मिलने के बाद शोध व नवाचारों पर भी पूरा फोकस किया जा रहा है। आईआईटी दिल्ली राष्ट्रीय क्वांटम मिशन में भी भागीदार है। यह क्वांटम प्रौद्योगिकियों में भारत की क्षमताओं को आगे बढ़ा रहा है। संस्थान नवाचार के लिए एक पावरहाउस के रूप में उभरा है, जिसमें 50 से अधिक स्टार्टअप रक्षा प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित हैं।

फंडिंग में विस्तार प्रोफेसर बनर्जी ने कहा, पिछले 6 सालों में सीएसआर फंडिंग का विस्तार हुआ है। कैंपस के भीतर कई उत्कृष्टता केंद्र सीएसआर द्वारा समर्थित हैं। यह नया ट्रेंड है और इसमें लगातार विस्तार हो रहा है। संस्थान ने उच्च शिक्षा वित्तपोषण एजेंसी (हीफा ) से 645 करोड़ रुपये के ऋण का महत्वपूर्ण इस्तेमाल किया है, जिसमें उन्नत उपकरण, पोस्ट-डॉक्टरल फेलोशिप और अनुसंधान बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के लिए 200 करोड़ रुपये से अधिक आवंटित किए गए हैं। इस फंडिंग ने शैक्षणिक और शोध दोनों क्षेत्रों में संस्थान की क्षमताओं को मजबूत किया है।

Asmita Sarkar

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