
सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि सभी दिव्यांग अभ्यर्थी, भले ही वे दिव्यांगता के मानक मानदंडों को पूरा नहीं करते, परीक्षा देने के लिए लेखक (स्क्राइब) की सुविधा ले सकते हैं। न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि इसका “उचित और न्यायोचित” अनुपालन सुनिश्चित करना केंद्र की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने कहा, “सभी दिव्यांग उम्मीदवारों को बिना किसी बाधा के परीक्षा देने में लाभ मिलना चाहिए, इसके लिए केंद्र द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए।”
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को 10 अगस्त 2022 के कार्यालय ज्ञापन पर पुनः विचार करने का निर्देश दिया और सभी प्रतिबंधों को हटाने और “उचित तरीके से” छूट देने को कहा।
इसके साथ ही, कोर्ट ने सभी प्राधिकारियों, भर्ती एजेंसियों और परीक्षा निकायों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि केंद्र द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए और इसका कड़ाई से अनुपालन समय-समय पर सर्वे या वेरिफिकेशन के जरिए सुनिश्चित किया जाए। कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों में समय-समय पर संवेदनशीलता अभियान चलाने का भी निर्देश दिया ताकि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाएं इस आदेश के प्रभावी कार्यान्वयन को लेकर जागरूक हो सकें।
इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को एक शिकायत निवारण पोर्टल स्थापित करने का आदेश दिया, ताकि अभ्यर्थी अपनी शिकायत सीधे अदालत में जाने से पहले इस पोर्टल के माध्यम से दर्ज कर सकें। केंद्र को यह भी निर्देश दिया गया कि वह स्क्राइब सर्टिफिकेट की वैधता बढ़ाए, जो वर्तमान में केवल छह महीने के लिए मान्य होता है, ताकि उम्मीदवारों को लंबी प्रतीक्षा से बचने का समय मिल सके, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। इसके अलावा, परीक्षा से पहले उम्मीदवारों को स्क्राइब से परिचित होने के लिए पर्याप्त समय देने का निर्देश भी दिया गया।
यह आदेश एक जनहित याचिका पर दिया गया था, जिसमें एक अभ्यर्थी ने बैंक परीक्षाओं में विकलांगता के आधार पर स्क्राइब की सुविधा, अतिरिक्त समय और अन्य सभी सुविधाओं की मांग की थी।




Add comment