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भारत में EdTech पर क्यों घट रहा छात्रों का भरोसा?

एक समय था जब भारत में कोचिंग सेंटर्स का दबदबा था—चाहे वे ऑनलाइन हों या ऑफलाइन। देश का उच्च शिक्षा नेटवर्क इतना विस्तृत था कि भारतीय कोचिंग सेंटर्स की वैश्विक स्तर पर भी पहचान बनी। खासतौर पर, कोरोना महामारी के दौरान ऑनलाइन शिक्षा और EdTech प्लेटफॉर्म्स की लोकप्रियता चरम पर थी। लेकिन हाल के वर्षों में, इस क्षेत्र में गिरावट देखी जा रही है। आखिर EdTech का यह पतन क्यों हो रहा है? आइए विस्तार से समझते हैं।

EdTech के बढ़ते प्रभाव और गिरावट की शुरुआत
1. महामारी के दौरान ऑनलाइन शिक्षा का उछाल
जब कोविड-19 के कारण स्कूल और कॉलेज बंद हुए, तो छात्रों के लिए ऑनलाइन शिक्षा ही एकमात्र विकल्प बचा। सरकार और निजी कंपनियों ने ऑनलाइन लर्निंग को बढ़ावा दिया।
– बड़े शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों ने ऑनलाइन कोर्स लॉन्च किए।
– Byju’s, Unacademy, Vedantu, Udemy जैसे प्लेटफॉर्म्स की लोकप्रियता बढ़ी।
– छात्रों को घर बैठे सीखने का अवसर मिला, जिससे ऑनलाइन शिक्षा एक नई क्रांति बन गई।

2. महामारी के बाद EdTech की गिरावट
हालांकि, परिस्थितियाँ सामान्य होते ही माता-पिता और छात्र पारंपरिक ऑफलाइन शिक्षा की ओर लौटने लगे। इसके कई कारण हैं:
i. ऑनलाइन पढ़ाई में प्रेरणा की कमी
– ऑनलाइन कोर्स के सिर्फ 30% हिस्से ही छात्र पूरा करते हैं।
– कुछ छात्र फीस भरने के बाद भी कोर्स शुरू नहीं करते।
– कई छात्रों को ऑनलाइन सीखने में एकाग्रता बनाए रखने में मुश्किल होती है।

ii. शिक्षक-छात्र संवाद की कमी
– ऑफलाइन कक्षाओं में टीचर्स के साथ इंटरैक्शन बेहतर होता है।
– ऑनलाइन कक्षाओं में छात्र प्रश्न पूछने से कतराते हैं।
– लाइव लेक्चर में ध्यान बनाए रखना कठिन होता है।

iii. इंटरनेट और तकनीकी चुनौतियाँ
– भारत के कई ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या है।
-सभी छात्रों के पास स्मार्टफोन, लैपटॉप या टैबलेट जैसी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं।
– गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए महंगे ऑनलाइन कोर्स खरीदना मुश्किल होता है।

iv. EdTech कंपनियों का आर्थिक संकट
Byju’s, जो कभी 22 बिलियन डॉलर की कंपनी थी, अब वित्तीय संकट का सामना कर रही है।
– Byju’s पर 8,300 करोड़ रुपये के कर्ज के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं।
– Unacademy और Vedantu ने हजारों कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया।
– कई स्टार्टअप्स को फंडिंग में कमी के कारण अपना संचालन बंद करना पड़ा।

ऑफलाइन कोचिंग सेंटर्स भी संकट में क्यों?
EdTech के अलावा, पारंपरिक कोचिंग सेंटर्स भी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
1. वित्तीय संकट और प्रशासनिक समस्याएँ
– FIITJEE जैसे प्रसिद्ध संस्थान आर्थिक संकट और प्रशासनिक समस्याओं के कारण बंद हो रहे हैं।
– उत्तर भारत में FIITJEE की 8 ब्रांच अचानक बंद हो गईं, जिससे सैकड़ों छात्र परेशान हो गए।
– कई शिक्षकों ने तनख्वाह न मिलने पर नौकरी छोड़ दी, जिससे संस्थान को बंद करना पड़ा।

2. सुरक्षा कारणों से कोचिंग सेंटरों की बंदी
– कोचिंग संस्थानों में आग लगने और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के मामले बढ़ गए हैं।
– 2023 में दिल्ली के मुखर्जी नगर में आग लगने से 60 से अधिक छात्र घायल हुए।
– 2022 में राव आईएएस स्टडी सेंटर में जलभराव के कारण 3 छात्रों की मौत हुई।
– दिल्ली सरकार ने 20 से अधिक कोचिंग सेंटरों को सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के कारण बंद कर दिया।

भविष्य में EdTech और कोचिंग सेक्टर की क्या संभावनाएँ हैं?
1. हाइब्रिड शिक्षा मॉडल का उदय
भविष्य में ऑनलाइन और ऑफलाइन शिक्षा का मिश्रण (Hybrid Learning) ज्यादा प्रभावी हो सकता है।
– छात्र ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से थ्योरी सीख सकते हैं और
– प्रैक्टिकल ज्ञान के लिए ऑफलाइन कोचिंग या स्कूल का सहारा ले सकते हैं।

2. गुणवत्ता में सुधार की जरूरत
EdTech प्लेटफॉर्म्स को छात्रों की भागीदारी बढ़ाने के लिए नए तरीकों को अपनाना होगा:
– इंटरएक्टिव कोर्सेस, लाइव क्विज़, पर्सनलाइज्ड लर्निंग को प्राथमिकता देनी होगी।
– कम लागत वाले प्लान और स्कॉलरशिप से अधिक छात्रों तक पहुँच बनानी होगी।

3. सुरक्षा मानकों का पालन
कोचिंग संस्थानों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी होगी, जिससे आगजनी और अन्य दुर्घटनाओं से बचा जा सके।

भारत में EdTech और कोचिंग सेक्टर दोनों ही बड़े बदलावों के दौर से गुजर रहे हैं।

– ऑनलाइन शिक्षा की लोकप्रियता बढ़ी, लेकिन प्रेरणा की कमी और आर्थिक संकट के कारण गिरावट आई।
– ऑफलाइन कोचिंग सेंटर्स आर्थिक मंदी और सुरक्षा समस्याओं से जूझ रहे हैं।

भविष्य में हाइब्रिड शिक्षा मॉडल को अपनाना और गुणवत्ता में सुधार करना ही इस संकट का समाधान हो सकता है।

Asmita Sarkar

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