
एक संसदीय समिति की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 2017 से SWAYAM प्लेटफॉर्म पर नामांकित छात्रों में से केवल 4% से भी कम ने अपने पाठ्यक्रम पूरे किए हैं। समिति ने इस कम भागीदारी पर चिंता जताते हुए बताया कि छात्रों को उपलब्ध सामग्री की प्रासंगिकता, शिक्षण में लचीलापन और तकनीकी बुनियादी ढांचे की कमियों को लेकर शिकायतें हैं।
प्लेसमेंट सहायता देने की सिफारिश
राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता में गठित समिति ने सुझाव दिया है कि डिजिटल शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को प्लेसमेंट सहायता देनी चाहिए। इसके अलावा, SWAYAM से जुड़े भर्तीकर्ताओं के लिए एक मंच विकसित करने की भी सिफारिश की गई है, जिससे छात्रों को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।
मंगलवार को राज्यसभा में पेश की गई रिपोर्ट “डीम्ड, निजी विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षा मानकों, मान्यता प्रक्रिया, अनुसंधान, परीक्षा सुधार और शैक्षणिक माहौल की समीक्षा” में कई अहम निष्कर्ष सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार, SWAYAM प्लेटफॉर्म पर कक्षा 9वीं से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, जिन्हें कोई भी व्यक्ति कभी भी, कहीं से भी एक्सेस कर सकता है। हालांकि, समिति ने चिंता जताई कि नामांकन के बावजूद छात्रों का कोर्स पूरा करने का अनुपात बेहद कम है।
सिर्फ 4% छात्रों ने पूरे किए पाठ्यक्रम
रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय डिजिटल विश्वविद्यालय (NDU), जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत समावेशी और लचीली शिक्षा का वादा करता है, SWAYAM के मौजूदा मॉडल की खामियों के कारण चुनौतियों का सामना कर रहा है। 2017 से अब तक SWAYAM पर नामांकित छात्रों में से केवल 4% ने अपने पाठ्यक्रम पूरे किए हैं।
शिक्षकों ने भी अपनी समस्याओं को लेकर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, कम वेतन, अपर्याप्त प्रशिक्षण और तकनीकी बाधाओं के कारण वे ऑनलाइन शिक्षण में पूरी तरह सहज नहीं हैं। इसके अलावा, 1:15 का शिक्षक-छात्र अनुपात बनाए रखने में असफलता के चलते वर्चुअल कक्षाओं में अत्यधिक भीड़भाड़ की समस्या उत्पन्न हो रही है।
इंटरनेट तक सीमित पहुंच और डिजिटल शिक्षा की चुनौतियां
समिति ने ऑक्सफैम इंडिया 2022 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के केवल 4% तथा अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के मात्र 7% छात्रों के पास इंटरनेट-सक्षम कंप्यूटर हैं। यह आंकड़े डिजिटल शिक्षा की समानता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
समिति ने स्पष्ट किया कि जब तक शिक्षा मंत्रालय छात्रों के प्लेसमेंट में सहायता नहीं करता या भर्तीकर्ताओं को जोड़ने के लिए एक समर्पित मंच तैयार नहीं करता, तब तक डिजिटल शिक्षा कार्यक्रमों में छात्रों की भागीदारी सीमित ही बनी रहेगी।
समिति की सिफारिशें
रिपोर्ट में मंत्रालय को निर्देश दिए गए हैं कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए कि छात्र अपने पाठ्यक्रम पूरे करें। साथ ही, समाज के वंचित वर्गों के छात्रों की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक विशेष सेल स्थापित करने और उनके नामांकन व प्रगति की निगरानी करने की सिफारिश की गई है।
सरकार को डिजिटल शिक्षा को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाने के लिए जरूरी सुधारों पर ध्यान देना होगा ताकि SWAYAM और राष्ट्रीय डिजिटल विश्वविद्यालय जैसी पहलें अपने उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा कर सकें।




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