
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में इस बार एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। जहां एक ओर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे विधायकों की संख्या में कमी आई है, वहीं दूसरी ओर नए विधायकों के शिक्षा स्तर और संपत्ति में भी कुछ अहम बदलाव सामने आए हैं।
चुनाव अधिकार संस्था, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के द्वारा की गई रिपोर्ट के अनुसार, इस बार 70 में से 31 विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जो कि पिछली बार की तुलना में कम हैं। हालांकि, एडीआर और दिल्ली इलेक्शन वॉच ने विधानसभा चुनावों में हिस्सा लेने वाले कुल 699 उम्मीदवारों के हलफनामों का विश्लेषण किया, और पाया कि गंभीर आपराधिक मामलों वाले विजयी उम्मीदवारों की संख्या अभी भी एक चिंता का विषय बनी हुई है।
दिल्ली विधानसभा के नए विधायकों में 64 प्रतिशत ने स्नातक या उससे उच्च डिग्री प्राप्त की है, जो एक सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है। वहीं, 33 प्रतिशत ने अपनी शैक्षिक योग्यता कक्षा 5 से कक्षा 12 तक बताई है, जो शिक्षा के स्तर में एक विविधता को दर्शाता है।
उम्र के हिसाब से देखें तो, 67 प्रतिशत विजयी उम्मीदवार की उम्र 41 से 60 वर्ष के बीच है, जबकि 20 प्रतिशत उम्मीदवारों की उम्र 60 वर्ष से अधिक है। इस आंकड़े से यह प्रतीत होता है कि दिल्ली विधानसभा में अधिकतर विजयी उम्मीदवार मध्यवर्गीय और अधिक अनुभवी हैं, जबकि कुछ बुजुर्ग भी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
महिलाओं का प्रतिनिधित्व इस बार घटा है। 2020 में जहां 8 महिलाएं चुनी गई थीं, वही अब केवल 5 महिलाएं ही चुनाव जीत पाई हैं। यह महिलाओं के राजनीति में प्रतिनिधित्व की दिशा में एक चिंता का विषय हो सकता है, जो आगे आने वाले चुनावों में सुधार की आवश्यकता को दर्शाता है।
सदन के लिए फिर से चुने गए विधायकों की संपत्ति में भी वृद्धि देखने को मिली है। रिपोर्ट के अनुसार, 22 उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 2020 में 7.04 करोड़ रुपये से 25 प्रतिशत बढ़कर 2025 में 8.83 करोड़ रुपये हो गई है। यह संपत्ति में वृद्धि न केवल व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति को दर्शाती है, बल्कि चुनावी खर्चों और राजनीति में वित्तीय संसाधनों की भूमिका पर भी प्रश्न उठाती है।
इस चुनावी रिपोर्ट से यह साफ जाहिर होता है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में कई नए पहलू सामने आए हैं, जिनसे भविष्य में राजनीति और चुनावी प्रक्रियाओं को समझने में मदद मिल सकती है।




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