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BCI का कानून के छात्रों से आपराधिक इतिहास की जानकारी मांगना अवैध नहीं; फैसले पर बॉम्बे हाईकोर्ट की मुहर

बंबई उच्च न्यायालय ने सोमवार को एक अहम फैसले में कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा कानून के छात्रों से उनके आपराधिक इतिहास की जानकारी मांगना कोई गैरकानूनी कदम नहीं है। यह फैसला उस याचिका पर आया, जिसमें 2024 के सितंबर में BCI द्वारा जारी परिपत्र को चुनौती दी गई थी।

अशोक येंडे नामक एक व्यक्ति ने जनहित याचिका (PIL) दायर कर इस परिपत्र को चुनौती दी थी। इसमें सभी विधि विश्वविद्यालयों और संस्थानों को यह निर्देश दिया गया था कि वे छात्रों से उनका आपराधिक इतिहास प्राप्त करें और अन्य संबंधित नियमों का पालन करें।

याचिका में यह दावा किया गया था कि यह शर्त छात्रों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है, और यह अन्य क्षेत्रों के छात्रों से नहीं मांगी जाती, जिससे यह भेदभावपूर्ण हो जाती है।

BCI के निर्देश
BCI के परिपत्र में कानून की शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और निगरानी बढ़ाने के लिए कई प्रावधान जोड़े गए थे, जिनमें शामिल थे:
– छात्रों के आपराधिक इतिहास की जांच की प्रक्रिया
– एक साथ डिग्री करने की अनुमति
– नियमित शैक्षणिक कार्यक्रमों में उपस्थिति की निगरानी
– बायोमेट्रिक हाजिरी
– सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश

हाईकोर्ट का निर्णय
मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे और न्यायमूर्ति भारती डांगरे की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि BCI को छात्रों के आपराधिक इतिहास की जानकारी लेने का पूरा अधिकार है और यह कदम कानूनी रूप से सही है। न्यायमूर्ति अराधे ने कहा, “बार काउंसिल ऑफ इंडिया को किसी छात्र के आपराधिक इतिहास की जांच क्यों नहीं करनी चाहिए? इसमें क्या अवैध है? किस कानून का उल्लंघन किया गया है? हमारे अनुसार, सर्कुलर में कुछ भी अवैध नहीं है।”

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि परिपत्र में केवल आपराधिक मामलों की जानकारी मांगी गई है, लेकिन यह नहीं कहा गया कि यदि किसी छात्र का आपराधिक रिकॉर्ड पाया जाता है तो उसका प्रवेश रद्द कर दिया जाएगा।

याचिका खारिज और चेतावनी
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि BCI के इस कदम का विरोध नहीं, बल्कि स्वागत किया जाना चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने न्यायिक समय बर्बाद करने के लिए याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगाने की चेतावनी दी। बाद में याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ले ली।

BCI का तर्क
BCI ने अपने परिपत्र में कहा कि विधि छात्रों को कानूनी पेशे की गरिमा बनाए रखने के लिए साफ आपराधिक रिकॉर्ड रखना चाहिए। इसलिए, अब सभी कानून के छात्रों को अपनी अंतिम मार्कशीट और डिग्री जारी होने से पहले किसी भी लंबित एफआईआर, आपराधिक केस, दोषसिद्धि या बरी होने की जानकारी देनी होगी।

यदि कोई छात्र जानबूझकर इस जानकारी को छिपाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें अंतिम मार्कशीट और डिग्री रोकने तक का प्रावधान हो सकता है।

 

Asmita Sarkar

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