Edinbox Hindi

यूजीसी ने पीएचडी धारकों को वेतनवृद्धि से किया इनकार, शिक्षक संगठन ने की कड़े शब्दों में निंदा

फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस (शिक्षक संगठन) ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी उस सर्कुलर की कड़े शब्दों में निंदा की है जिसमें उन्होंने स्थायी नियुक्ति के स्तर पर एम.फिल. और पीएचडी धारकों के लिए अग्रिम वेतन वृद्धि  देने से इनकार किया है। यूजीसी का यह निर्णय शिक्षण समुदाय के लिए  काफी निराशाजनक है। इसको लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षकों में गहरा रोष व्याप्त है जो कभी भी एक व्यापक आंदोलन का रूप ले सकता है। इस सर्कुलर से डीयू के हजारों शिक्षक प्रभावित होंगे। 

फोरम के चेयरमैन डॉ.हंसराज सुमन ने यूजीसी चेयरमैन से शिक्षक विरोधी सर्कुलर को वापिस लेने की मांग की है और कहा है कि यूजीसी के इस रवैये से उच्च शिक्षण संस्थानों के शैक्षणिक गुणवत्ता पर काफी बुरा असर पड़ेगा तथा भविष्य में कोई भी शोधार्थी इस व्यवसाय में आने के लिए पीएचडी नहीं करेगा। उनका कहना है कि एक तरफ सरकार उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शिक्षण संस्थान खोल रही है, वहीं दूसरी तरफ पीएचडी धारकों की अग्रिम वेतन वृद्धि देने से मना कर रही है। 

डॉ. हंसराज सुमन का यह भी कहना है कि यूजीसी के इस तरह के निर्णयों से शिक्षकों के वर्षों के कठोर शैक्षणिक प्रयास और अभूतपूर्व शोध को पूरी तरह से नजरअंदाज करना है। उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित करने और जांच की भावना को बढ़ावा देने के बजाय, यह गुणवत्तापूर्ण शोध और शिक्षा के लिए समर्पित लोगों को हतोत्साहित करने वाला सर्कुलर जारी किया गया है। साथ ही यूजीसी का इस तरह के दृष्टिकोण से भविष्य में आने वाले शोधार्थियों के मनोबल को कम करता है और भारत के शैक्षणिक और अनुसंधान परिदृश्य को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्धता की चिंताजनक कमी को दर्शाता है। उनका यह भी कहना है कि उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के बजाय, यह प्रतिगामी कदम शिक्षकों के पेशेवर और वित्तीय विकास को रोकता है जिससे शिक्षा जगत में करियर कम आकर्षक होता जाएगा। उन्होंने कहा है कि हम इस निर्णय का पुरजोर विरोध करते हैं और यूजीसी चेयरमैन से आग्रह करते हैं कि वे इस सर्कुलर को तुरंत वापिस लें। उनका कहना है कि इस निर्णय का पुनर्मूल्यांकन हो और उन लोगों के लिए सार्थक प्रोत्साहन बहाल करें जिन्होंने ज्ञान और छात्रवृत्ति को आगे बढ़ाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है। 

Asmita Sarkar

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed