
वैज्ञानिकों ने एक विशेष प्रकार के वायरस, जंबो फेज का अध्ययन कर बैक्टीरिया के खिलाफ नई एंटीबायोटिक दवाओं के विकास की संभावना जताई है। जंबो फेज वायरस बैक्टीरिया को संक्रमित कर उनके डीएनए को बदल देते हैं और बैक्टीरिया की प्रणाली का उपयोग करके अपनी प्रतिकृति बनाते हैं, जिससे बैक्टीरिया अंततः नष्ट हो जाते हैं।
जंबो फेज सामान्य फेज से चार गुना अधिक डीएनए रखते हैं और बैक्टीरिया के अंदर एक सुरक्षित स्थान बनाते हैं, जिसे एक सुरक्षा कवच से घेरा जाता है। यह कवच केवल आवश्यक प्रोटीन को अंदर जाने की अनुमति देता है। यह महत्वपूर्ण शोध “नेचर” पत्रिका में प्रकाशित हुआ है और इसमें कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सैन फ्रांसिस्को के वैज्ञानिकों का योगदान है।
फेज थेरेपी पर ध्यान केंद्रित
जंबो फेज बैक्टीरियोफेज का एक प्रकार हैं, जिनकी खोज 100 साल पहले हुई थी। ये वायरस बैक्टीरिया को संक्रमित कर उन्हें नष्ट करते हैं और पहले इन्हें बैक्टीरिया संक्रमण के इलाज के लिए संभावित समाधान माना जाता था। लेकिन एंटीबायोटिक दवाओं के विकास के बाद इस पर शोध धीमा पड़ गया। हालांकि, हाल के वर्षों में एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी बैक्टीरिया की समस्या बढ़ने के कारण वैज्ञानिकों ने फिर से फेज थेरेपी पर ध्यान देना शुरू किया है।
नई एंटीबायोटिक दवाओं के विकास में सहायक
इस शोध में स्यूडोमोनास बैक्टीरिया का उपयोग किया गया, जो कई एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी होता है। इस शोध के परिणाम नई एंटीबायोटिक दवाओं के विकास में सहायक हो सकते हैं, साथ ही फेज थेरेपी को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
जीन संपादन तकनीक का उपयोग
वैज्ञानिकों ने सीआरआईएसपीआर (CRISPR) तकनीक का उपयोग करके जंबो फेज में आवश्यक आनुवंशिक परिवर्तन करने की विधि विकसित की है। यह तकनीक वैज्ञानिकों को बैक्टीरिया में वायरस से बचने के लिए वायरस के जीनोम में बदलाव करने की अनुमति देती है, जिससे बैक्टीरिया वायरस के खिलाफ अपनी रक्षा कर पाते हैं।




Add comment