
मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित जीवाजी विश्वविद्यालय में राज्यपाल मंगू भाई पटेल के आदेश पर कुलगुरु डॉ. अविनाश तिवारी और EC सदस्य को बर्खास्त कर दिया गया है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय में धारा 52 लागू कर दी गई है। यह कार्रवाई एक फर्जी कॉलेज को मान्यता देने के मामले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद की गई।
यह मामला आठ महीने पहले मुरैना जिले के झुंडपुरा स्थित शिव शक्ति कॉलेज से जुड़ा था, जिसे यूनिवर्सिटी ने कागजों में पिछले 14 वर्षों से मान्यता दे रखी थी, जबकि यह कॉलेज अस्तित्व में ही नहीं था। कॉलेज में डॉ. अरुण शर्मा को प्राचार्य के रूप में तैनात दिखाया गया था। जब डॉ. अरुण शर्मा को इस बारे में जानकारी मिली, तो उन्होंने विरोध शुरू कर दिया, जिसके बाद EOW ने मामले की जांच की और 13 जनवरी को एफआईआर दर्ज की।
एफआईआर के बावजूद जब कोई एक्शन नहीं लिया गया, तो डॉ. अरुण शर्मा ने विश्वविद्यालय की प्रमुख बिल्डिंग के नीचे सत्याग्रह शुरू किया और राजभवन तक साइकिल यात्रा निकाली। आखिरकार, राज्यपाल ने इस मामले पर संज्ञान लिया और मंगलवार शाम को आदेश जारी कर सभी आरोपियों को बर्खास्त कर दिया। इसके साथ ही डॉ. राजकुमार आचार्य को विश्वविद्यालय का कुलगुरु नियुक्त किया गया।
इस मामले की जांच के दौरान डॉ. अरुण शर्मा ने 8 महीने में 147 आरटीआई लगाकर 400 पेज के प्रमाणित दस्तावेज़ जुटाए। इन दस्तावेजों के आधार पर उनका कहना है कि ग्वालियर-चंबल संभाग के आठ जिलों में करीब 400 फर्जी कॉलेज संचालित हो रहे हैं, जिनका वह जल्द ही खुलासा करेंगे।




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