
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिल्ली विश्वविद्यालय के 101वें दीक्षांत समारोह में छात्रों को डिग्री प्रदान करते हुए उनसे राष्ट्रीय राजधानी को दुनिया का ज्ञान केंद्र बनाने का संकल्प लेने का आग्रह किया।
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की भूमिका को भारत के बौद्धिक और व्यावसायिक परिदृश्य को आकार देने में अहम बताते हुए प्रधान ने कहा कि यह सिर्फ एक विश्वविद्यालय नहीं है, बल्कि भारत का एक लघु प्रतिनिधित्व है, जिसमें 85 देशों के लगभग सात लाख छात्र नामांकित हैं, जो प्रत्यक्ष और मुक्त शिक्षण पद्धतियों का हिस्सा हैं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रधान ने डीयू के प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों जैसे पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली और दिल्ली की नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का उल्लेख करते हुए विश्वविद्यालय की समृद्ध विरासत पर प्रकाश डाला।
उन्होंने छात्रों को उनके सामाजिक कौशल और प्रथाओं के महत्व को समझाते हुए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को भारत के वैश्विक शैक्षणिक विकास के लिए एक मार्गदर्शक रोडमैप के रूप में रेखांकित किया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने डीयू की भूमिका को स्वीकार करते हुए, संस्थान से आग्रह किया कि वह 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के मिशन का नेतृत्व करे।
डीयू के विस्तार को लेकर प्रधान ने आशा व्यक्त की और बताया कि विश्वविद्यालय के उत्तरी और दक्षिणी परिसरों के अलावा, कुलपति योगेश सिंह के नेतृत्व में पूर्वी और पश्चिमी परिसरों की स्थापना की प्रक्रिया भी चल रही है।
कार्यक्रम के दौरान, शिक्षा मंत्री ने डिजिटल माध्यम से 1,66,494 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की और 10 उत्कृष्ट विद्यार्थियों को व्यक्तिगत रूप से पदक दिए।
दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति योगेश सिंह ने छात्रों को दृढ़ता और कड़ी मेहनत की अहमियत समझाई, और कहा कि कड़ी मेहनत से असंभव कार्य भी संभव हो जाता है।
डीयू की 102 वर्षों की यात्रा पर विचार करते हुए, कुलपति ने विश्वविद्यालय की उत्कृष्टता की प्रतिबद्धता और भविष्य के नेताओं को तैयार करने में इसकी जिम्मेदारी पर जोर दिया। उन्होंने छात्रों को व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को राष्ट्रीय हितों के साथ संतुलित करने की सलाह दी और उन्हें याद दिलाया कि दीर्घकालिक सफलता के लिए गहरे मूल्य जरूरी होते हैं। कुलपति ने शिक्षकों से अपने पेशे में जुनून और आनंद खोजने की भी अपील की।
इस वर्ष के दीक्षांत समारोह में 316 पुरुष और 307 महिलाओं सहित कुल 623 छात्रों को पीएचडी की डिग्री प्रदान की गई। इसके अलावा, नियमित और गैर-कॉलेजिएट महिला शिक्षा बोर्ड की छात्राओं सहित 83,902 छात्राओं को डिग्री दी गई। साथ ही, स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) के 82,592 छात्रों को भी डिग्री प्राप्त हुई।




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