
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (CSU) की कार्यकारी परिषद की बैठक में शैक्षणिक सत्र 2025-26 से चार वर्षीय स्नातक (शास्त्री ऑनर्स) और एक वर्षीय स्नातकोत्तर (आचार्य) पाठ्यक्रम को मंजूरी दी गई। चार वर्षीय शास्त्री ऑनर्स को बीए ऑनर्स और एक वर्षीय आचार्य की डिग्री को एमए के समकक्ष माना जाएगा।
महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा
बैठक में महिला सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए सीएसयू के कैंपस से पीएचडी करने वाली 10 महिलाओं को स्कॉलरशिप देने का भी निर्णय लिया गया।
चार प्लस एक मॉडल पर होगी पढ़ाई
कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने बताया कि चार प्लस एक मॉडल के तहत पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा। इसके अंतर्गत चार वर्षीय शास्त्री प्रतिष्ठा (बीए ऑनर्स) पाठ्यक्रम और उसके बाद एक वर्ष की पढ़ाई पर आचार्य (एमए) की उपाधि दी जाएगी। इससे छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में कम समय लगेगा और शोध के अधिक अवसर मिलेंगे।
देशभर के 11 कैंपस में होगा लागू
सीएसयू की कार्यकारी परिषद का यह निर्णय देशभर के 11 संस्कृत विश्वविद्यालयों में भी लागू किया जाएगा। इसमें श्रीरणवीर परिसर जम्मू (जम्मू-कश्मीर), श्रीगंगानाथ झा प्रयागराज व लखनऊ परिसर (यूपी), श्रीरघुनाथ-कीर्ति परिसर, पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड), वेदव्यास परिसर, बलाहर (हिमाचल प्रदेश), जयपुर कैंपस (राजस्थान), भोपाल परिसर (मध्य प्रदेश), श्रीसदाशिव परिसर पुरी (ओडिशा), केजे सोमैया कैंपस (महाराष्ट्र), एकलव्य कैंपस (अगरतला), राजीव गांधी कैंपस, शृंगेरी (कर्नाटक) और गुरुवयूर कैंपस, त्रिचुर (केरल) शामिल हैं।
इस नए पाठ्यक्रम के लागू होने से संस्कृत विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा में नए अवसर प्राप्त होंगे।




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