
आजकल बच्चों के लिए स्मार्टफोन का इस्तेमाल स्कूलों में आम बात हो गई है। कुछ स्कूल इसके उपयोग को लेकर सख्त होते हैं और अपने नियमों में इस पर प्रतिबंध लगा देते हैं। इसी पर दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक अहम टिप्पणी की, जिसमें कहा गया कि स्कूली छात्रों पर स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना “अवांछनीय और अव्यवहारिक” है। कोर्ट ने इसे विनियमित और निगरानी किए जाने की आवश्यकता बताई।
दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने स्मार्टफोन के उपयोग को लेकर गाइडलाइंस जारी कीं। इन गाइडलाइंस का उद्देश्य स्कूली छात्रों को स्मार्टफोन के लाभकारी और हानिकारक प्रभावों के बीच संतुलन स्थापित करने में मदद करना है। जस्टिस ने कहा कि स्कूलों को छात्रों को जिम्मेदार ऑनलाइन शिष्टाचार, डिजिटल शिष्टाचार और स्मार्टफोन के नैतिक उपयोग के बारे में शिक्षित करना चाहिए। साथ ही, छात्रों को यह भी सलाह दी जानी चाहिए कि अत्यधिक स्क्रीन-टाइम और सोशल मीडिया के उपयोग से चिंता, ध्यान की कमी और साइबर-बुलिंग जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
आदेश में क्या कहा गया?
जस्टिस भंभानी ने 28 फरवरी को पारित आदेश में कहा, “पिछले कुछ वर्षों में टेक्नोलॉजी के उपयोग में काफी बदलाव आया है, जिसमें शैक्षिक और अन्य उद्देश्यों का भी समावेश है। इसलिए, स्कूलों में छात्रों पर स्मार्टफोन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना अव्यवहारिक और अवांछनीय है।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि स्मार्टफोन का दुरुपयोग तो हो सकता है, लेकिन इसके कई लाभकारी पहलू भी हैं, जैसे माता-पिता और बच्चों के बीच जुड़ाव स्थापित करना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना। इसके चलते कोर्ट ने कहा कि स्मार्टफोन के उपयोग पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाई जानी चाहिए, लेकिन इसका विनियमन और निगरानी ज़रूरी है।
क्या व्यवस्था होनी चाहिए?
कोर्ट ने कहा कि जहां तक संभव हो, स्कूलों को छात्रों को अपने स्मार्टफोन स्कूल में आते समय जमा करने और घर लौटते समय वापस लेने की व्यवस्था करनी चाहिए। इसके साथ ही, कक्षाओं में स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगाई जानी चाहिए, ताकि पढ़ाई और शैक्षणिक माहौल में कोई विघ्न न हो। कोर्ट ने स्कूलों के सामान्य क्षेत्रों और स्कूल वाहनों में भी स्मार्टफोन के कैमरे और रिकॉर्डिंग सुविधाओं का इस्तेमाल प्रतिबंधित करने की सलाह दी।
कोर्ट ने कहा कि स्मार्टफोन का उपयोग सुरक्षा और कनेक्टिविटी के लिए किया जा सकता है, लेकिन इसे मनोरंजन या मनोरंजन के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही, स्मार्टफोन के उपयोग की निगरानी और विनियमन के लिए नीति को माता-पिता, शिक्षकों और विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार किया जाना चाहिए।
नीति में संशोधन की आवश्यकता
कोर्ट ने कहा कि स्कूलों में स्मार्टफोन के उपयोग के नियमों के उल्लंघन के लिए स्पष्ट, निष्पक्ष और लागू करने योग्य परिणाम तय किए जाने चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नीति अत्यधिक कठोर न हो, लेकिन इसका प्रभावी तरीके से पालन किया जाए। टेक्नोलॉजी की प्रगति और उभरती चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, नीति की नियमित समीक्षा और संशोधन की आवश्यकता है।
यह मामला केंद्रीय विद्यालय में पढ़ने वाले एक छात्र द्वारा दायर किया गया था। हालांकि इस मुद्दे पर पहले सीबीएसई और केवीएस द्वारा 2009 में दिशानिर्देश जारी किए गए थे, लेकिन कोर्ट ने पाया कि उनका प्रभावी परिणाम नहीं निकला।




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