
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर घोषणा की कि उनकी सरकार उन सभी शिक्षण संस्थानों की फेडरल फंडिंग रोक देगी, जो अवैध विरोध प्रदर्शनों को मंजूरी देंगे। यह ऐलान उस वक्त आया है जब इजरायल-गाजा संघर्ष के कारण अमेरिकी कॉलेज कैंपसों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, साथ ही यहूदी-विरोधी भावना में भी वृद्धि देखी जा रही है, जिससे यहूदी छात्रों की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और स्कूलों के लिए है, जो विरोध प्रदर्शन की अनुमति देते हैं। उन्होंने अमेरिकी और विदेशी छात्रों को भी आगाह किया है। ट्रंप ने कहा है कि ऐसे प्रदर्शनकारियों को जेल भेजा जा सकता है या उन्हें उनके देश में डिपोर्ट किया जा सकता है, जबकि अमेरिकी छात्रों को निष्कासन या गिरफ्तारी का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप पहले भी लिंग, रंग, ट्रांसजेंडर एथलीटों और कोविड-19 वैक्सीनेशन से जुड़े संस्थानों की फंडिंग रोकने की धमकी दे चुके हैं।
ट्रंप ने ‘ट्रूथ सोशल’ पर लिखा, “किसी भी कॉलेज, स्कूल या विश्वविद्यालय को अवैध विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने पर उनकी सभी फेडरल फंडिंग बंद कर दी जाएगी। प्रदर्शनकारी जेल भेजे जाएंगे या उन्हें उनके देश में स्थायी रूप से डिपोर्ट किया जाएगा। अमेरिकी छात्रों को निष्कासित किया जाएगा या उन्हें अपराध के आधार पर गिरफ्तार किया जाएगा। नो मास्क!”
हालांकि, जब ट्रंप के एक प्रवक्ता से यह पूछा गया कि व्हाइट हाउस अवैध विरोध प्रदर्शनों को कैसे परिभाषित करेगा और सरकार प्रदर्शनकारियों को कैसे गिरफ्तार करेगी, तो इसका कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अमेरिकी संविधान का पहला संशोधन भाषण और सभा की स्वतंत्रता की गारंटी देता है।




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