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भारत की इन प्रमुख यूनिवर्सिटीज में मुस्लिम छात्रों को मिलता है रिजर्वेशन, जानिए कैसे होता है एडमिशन

भारत में कई प्रमुख शैक्षिक संस्थान हैं जो मुस्लिम समुदाय के लिए बनाए गए हैं। इनमें केंद्रीय विश्वविद्यालय, राज्य विश्वविद्यालय और निजी संस्थान शामिल हैं। इन संस्थानों में मुस्लिम छात्रों के लिए विशेष आरक्षण की व्यवस्था होती है।

दिल्ली क्षेत्र के प्रमुख संस्थान:

जामिया मिलिया इस्लामिया: यह एक प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालय है, जिसकी स्थापना 1920 में हुई थी। 1988 में इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला और 2011 में इसे अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा दिया गया। यहां मुस्लिम छात्रों को 50% आरक्षण मिलता है।

जामिया हमदर्द: यह आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा में विशेषज्ञता रखने वाला एक प्रसिद्ध संस्थान है। इसे 1989 में मानद विश्वविद्यालय का दर्जा मिला।

दक्षिण भारत के प्रमुख संस्थान:

मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय (हैदराबाद): यह केंद्रीय विश्वविद्यालय है, जिसे भारत के पहले शिक्षा मंत्री के नाम पर रखा गया है। इसे अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त है।

उस्मानिया विश्वविद्यालय (हैदराबाद): यह ऐतिहासिक संस्थान है, जिसकी स्थापना 1918 में निज़ाम द्वारा की गई थी। इसे अब धर्मनिरपेक्ष विश्वविद्यालय माना जाता है।

बी.एस. अब्दुर रहमान क्रेसेंट इंस्टिट्यूट (तमिलनाडु): यह एक प्रमुख निजी विश्वविद्यालय है, जिसकी स्थापना 1984 में हुई थी।

खाजा बंदनवाज विश्वविद्यालय (गुलबर्गा, कर्नाटक): 2018 में स्थापित यह संस्थान प्रसिद्ध सूफी संत बंदे नवाज़ के नाम पर रखा गया है।

पूर्वी भारत के प्रमुख संस्थान:

आलिया विश्वविद्यालय (कोलकाता): इसकी स्थापना 1869 में हुई थी और यह पश्चिम बंगाल में मुस्लिम शिक्षा का प्रमुख केंद्र है।

मौलाना मजहरुल हक अरबी एंड पर्शियन यूनिवर्सिटी (पटना): इसकी स्थापना 1998 में हुई और यह अरबी और फारसी भाषाओं में विशेषज्ञता रखता है।

उत्तर भारत के प्रमुख संस्थान:

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय (लखनऊ): इसकी स्थापना 2009 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा की गई थी।

मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय (रामपुर): इसकी स्थापना 2006 में हुई और यह बहु-विषयक शिक्षा प्रदान करता है।

मौलाना आज़ाद विश्वविद्यालय (जोधपुर, राजस्थान): इसकी स्थापना 2013 में हुई थी।

इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (जम्मू-कश्मीर): इसकी स्थापना 2005 में हुई और 2006 से शिक्षण कार्यक्रम शुरू हुए।

प्रवेश प्रक्रिया:
इन अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में प्रवेश कॉमन एंट्रेंस टेस्ट के आधार पर मेरिट से होता है। कुल सीटों का 50% अल्पसंख्यक समुदाय के लिए आरक्षित रहता है, जबकि बाकी 50% सीटें अन्य समुदायों के लिए होती हैं। यदि अल्पसंख्यक कोटे में सीटें खाली बचती हैं, तो उन्हें अन्य समुदायों के छात्रों से भरा जा सकता है।

 

 

Asmita Sarkar

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