
दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने अभिभावकों और स्कूल प्रशासन को सतर्क करते हुए आगाह किया है कि वे ऐसे व्यक्तियों या संगठनों के झांसे में न आएं, जो स्कूल में दाखिले की गारंटी देने का झूठा दावा करते हैं। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुसार होती है, इसलिए किसी भी फर्जी वादे पर भरोसा न करें।
एक परिपत्र जारी कर शिक्षा निदेशालय ने कहा, “यह देखा गया है कि कुछ व्यक्ति, संगठन और संस्थाएं स्कूलों में प्रवेश की गारंटी देने या उसे प्रभावित करने का दावा करके अभिभावकों को गुमराह कर रहे हैं।”
स्कूल प्रबंधन और एजेंटों के बीच किसी भी संबंध से बचने का निर्देश
परिपत्र में यह भी निर्देश दिया गया है कि स्कूल प्रबंधन, निजी एवं सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों के प्रमुखों को किसी भी प्रवेश परामर्श एजेंसी, वेबसाइट या व्यक्तिगत एजेंटों के साथ आधिकारिक या अनौपचारिक संबंध बनाने से बचना चाहिए।
शिक्षा निदेशालय ने इस बात पर जोर दिया कि दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम एवं नियम, 1973 की धारा 17 के तहत प्रवेश से पहले या बाद में किसी भी प्रकार का दान, कैपिटेशन शुल्क, परामर्श शुल्क या सुविधा शुल्क लेना सख्त वर्जित है।
फर्जी प्रवेश दिलाने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई
परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि “विभाग शिक्षा के व्यावसायीकरण को रोकने के लिए पूरी तरह सक्षम और प्रतिबद्ध है।” इसके साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि ऐसी अवैध गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा निदेशालय ने अभिभावकों से अपील की है कि वे प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें और किसी भी तरह के फर्जी दावों से सावधान रहें।




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