
भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने अपनी प्रमुख योजना एआईसीटीई-वाणी (AICTE-VAANI) का दूसरा संस्करण लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य भारतीय भाषाओं में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत, एआईसीटीई देशभर के कॉलेजों को 4 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करेगा, जिससे 200 सम्मेलन, सेमिनार और कार्यशालाएं आयोजित की जा सकेंगी। ये आयोजन 22 क्षेत्रीय भाषाओं में होंगे और इनमें उभरते तकनीकी विषयों पर चर्चा की जाएगी।
वाणी का उद्देश्य: क्षेत्रीय भाषाओं में तकनीकी शिक्षा को सशक्त बनाना
एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रोफेसर टी.जी. सीताराम ने कहा कि वाणी (Vibrant Advocacy for Advancement and Nurturing of Indian Languages) योजना का उद्देश्य भारतीय भाषाओं में मजबूत ज्ञान-आधार स्थापित करना है, ताकि नई तकनीकी उन्नतियों की जानकारी स्थानीय भाषाओं में भी लोगों तक पहुंचे। इस योजना के तहत शैक्षणिक संस्थानों को भारतीय भाषाओं में शोध पत्र प्रकाशित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा और यह शिक्षा व उद्योग जगत के बीच सहयोग को भी बढ़ावा देगा।
एआईसीटीई के उपाध्यक्ष डॉ. अभय जरे ने कहा, “सभी भाषाओं में समस्या-समाधान और चिंतन क्षमता को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। साथ ही, भविष्य के शोध और संदर्भ के लिए सभी आयोजनों का एक व्यापक रिपोजिटरी तैयार करने पर विचार किया जाना चाहिए।”
अब 22 भारतीय भाषाओं में होंगे सम्मेलन और कार्यशालाएं
इस वर्ष योजना में क्षेत्रीय भाषाओं की संख्या 12 से बढ़ाकर 22 कर दी गई है और संवेदनशील तकनीकी क्षेत्रों की संख्या भी 12 से बढ़ाकर 16 कर दी गई है। प्रमुख तकनीकी क्षेत्रों में क्वांटम तकनीक, हाइड्रोजन ऊर्जा, अंतरिक्ष और रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा विज्ञान, एग्रीटेक और खाद्य प्रसंस्करण, साइबर सुरक्षा शामिल हैं।
कॉलेजों को मिलेगी 2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता
एआईसीटीई-वाणी 2025 के तहत कॉलेजों को 2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। योजना के लिए कुल 4 करोड़ रुपये का वार्षिक बजट निर्धारित किया गया है। आयोजन 22 क्षेत्रीय भाषाओं में होंगे, जिनमें असमिया, बंगाली, हिंदी, कन्नड़, गुजराती, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मराठी, ओडिया, पंजाबी, संस्कृत, संथाली, सिंधी, तमिल, तेलुगु और उर्दू शामिल हैं।
आवेदन प्रक्रिया और चयन मानदंड
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 25 मार्च से 24 अप्रैल तक एआईसीटीई-अटल पोर्टल पर शुरू होगी। चयन प्रक्रिया के दौरान संस्थानों को एआईसीटीई के मानकों के आधार पर परखा जाएगा, ताकि सेमिनार, सम्मेलन और कार्यशालाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
कॉलेजों की सकारात्मक प्रतिक्रिया
कोलकाता के टेक्नो इंटरनेशनल न्यू टाउन (TINT) कॉलेज की सहायक प्रोफेसर निलांजना दत्ता रॉय ने कहा, “एआईसीटीई-वाणी के माध्यम से एआईसीटीई क्षेत्रीय भाषाओं में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा दे रहा है। इस वर्ष जनवरी में हमने बंगाली भाषा में सुपरकंप्यूटिंग और क्वांटम कंप्यूटिंग पर एक दो-दिवसीय कार्यशाला आयोजित की थी, जिसमें एआईसीटीई से वित्तीय सहायता प्राप्त हुई।”
एआईसीटीई-वाणी 2025 के तहत इस पहल से भारतीय भाषाओं में तकनीकी शिक्षा को मजबूती मिलेगी और देशभर के छात्रों व शिक्षकों को उभरते हुए तकनीकी क्षेत्रों में नई संभावनाएं तलाशने का अवसर मिलेगा।




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