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भारतीय शोधकर्ता अमेरिका में गिरफ्तार, हमास का समर्थन करने का है आरोप

अमेरिका में जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में अध्ययनरत भारतीय शोधकर्ता बदर खान सूरी को अमेरिकी आव्रजन अधिकारियों ने गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि अमेरिका के एक जज ने बड़ी राहत देते हुए उनके निर्वासन पर फिलहाल रोक लगा दी है। इससे पहले उनपर निर्वासन की तलवार लटक रही थी। उनके वकील ने इस संबंध में जानकारी दी है। पोस्ट-डॉक्टरल फेलो सूरी को सोमवार रात वर्जीनिया में उनके घर के बाहर “नकाबपोश एजेंटों” ने हिरासत में लिया था।

गिरफ्तारी के पीछे के आरोप
मुकदमे के अनुसार, एजेंटों ने स्वयं को होमलैंड सिक्योरिटी विभाग का कर्मचारी बताया और कहा कि सरकार ने सूरी का वीजा रद्द कर दिया है। उन पर “हमास का दुष्प्रचार फैलाने” और “किसी ज्ञात या संदिग्ध आतंकवादी से घनिष्ठ संबंध रखने” का आरोप लगाया गया है।

होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की सहायक सचिव ट्रिशिया मैकलॉघलिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि सूरी जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के एक विदेशी छात्र हैं और “सोशल मीडिया पर यहूदी विरोधी भावना को बढ़ावा देते रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि सूरी के एक वरिष्ठ हमास सलाहकार से घनिष्ठ संबंध हैं, जिसके कारण उन्हें INA धारा 237(a)(4)(C)(i) के तहत निर्वासन योग्य माना गया है।

बद्र खान सूरी ने अपने निर्वासन के खिलाफ अदालत में अपील की थी। गुरुवार को वर्जीनिया अदालत की जज पैट्रिसिया टोलिवर जाइल्स ने अपने आदेश में बद्र खान सूरी के निर्वासन पर अदालत के अगले आदेश तक रोक लगा दी। बद्र सूरी को लुइसियाना के एक डिटेंश सेंटर में हिरासत में रखा गया है। अमेरिका के मानवाधिकार संगठन अमेरिकन सिविल लिबर्ट्रीज यूनियन ने भी इस मामले में एक याचिका दायर की थी।

वकील ने दी सफाई
सूरी के वकील हसन अहमद ने अदालत में तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को उनकी पत्नी की फिलिस्तीनी विरासत के कारण निशाना बनाया जा रहा है। सूरी की पत्नी मेफेज सालेह, जो गाजा की रहने वाली हैं, जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के समकालीन अरब अध्ययन केंद्र में प्रथम वर्ष की छात्रा हैं।

शैक्षिक पृष्ठभूमि
मेफेज सालेह ने गाजा स्थित इस्लामिक यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता और सूचना विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है। उन्होंने भारत में नई दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में नेल्सन मंडेला सेंटर फॉर पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट रेजोल्यूशन से संघर्ष विश्लेषण और शांति स्थापना में मास्टर्स डिग्री भी हासिल की है।

इस मामले पर अमेरिकी सरकार और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

Asmita Sarkar

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