
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से संबद्ध यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज (UCMS) को अलग किए जाने का मामला एक बार फिर से चर्चा में आ गया है। दिल्ली सरकार ने UCMS को अपने अधीन लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस संबंध में दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने डीयू कुलसचिव को आदेश भेजा है, जिसमें विश्वविद्यालय को अपने संस्थानों की सूची से UCMS को हटाने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने इस अधिग्रहण की प्रक्रिया 1 अप्रैल तक पूरी करने का आदेश दिया है।
स्वास्थ्य विभाग ने वित्तीय विभाग से अनुरोध किया है कि UCMS के लिए आपातकालीन आधार पर 100 करोड़ रुपये का फंड आवंटित किया जाए, ताकि अधिग्रहण के बाद किसी भी वित्तीय समस्या से बचा जा सके।
यह पहला मौका नहीं है जब UCMS के अधिग्रहण का मुद्दा उठा हो। 2015-16 में भी इस संस्थान को दिल्ली सरकार के अधीन किए जाने का प्रयास हुआ था, जिसका UCMS के कर्मचारियों ने कड़ा विरोध किया था। यह मामला कोर्ट तक पहुंचा और लंबे समय तक कानूनी विवाद में उलझा रहा। हाल ही में, 2024 में कोर्ट ने इस मामले पर लगी रोक हटा दी, जिसके बाद दिल्ली सरकार ने UCMS के अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आदेश दिया है।
शिक्षकों और कर्मचारियों के हितों पर खतरा
दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (DUTA) और इंडियन नेशनल टीचर्स कांग्रेस (INTEC) ने दिल्ली सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। INTEC के चेयरमैन प्रो. पंकज गर्ग ने कहा कि यह डीयू के अध्यादेशों और विधियों का पूर्ण उल्लंघन है। उन्होंने तर्क दिया कि संबद्धता या गैर-संबद्धता का मामला विश्वविद्यालय और संबद्ध संस्थान के बीच का विषय है, और डीयू एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है, जिसे राज्य सरकार के आदेशों के अनुसार कार्य करने की बाध्यता नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि UCMS के शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी और छात्र दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतर्गत आते हैं, और उनकी सेवा शर्तें शिक्षा मंत्रालय द्वारा निर्धारित की जाती हैं। यदि यह संस्थान दिल्ली सरकार के अधीन आता है, तो इससे शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों के हितों को गंभीर नुकसान हो सकता है।
डीयू से कार्रवाई की मांग
शिक्षकों और कर्मचारियों के विरोध को देखते हुए डीयू प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है कि वह दिल्ली सरकार के 18 मार्च को जारी किए गए आदेश को खारिज करे। कई शिक्षक संगठनों का मानना है कि यदि UCMS को दिल्ली सरकार के अधीन किया गया, तो इससे न केवल कर्मचारियों की सेवा शर्तों में बदलाव आएगा, बल्कि संस्थान की स्वायत्तता भी प्रभावित होगी।
अब इस पूरे मामले में डीयू की कार्यकारी परिषद की भूमिका अहम होगी, जो तय करेगी कि UCMS को दिल्ली सरकार के अधीन किया जाए या नहीं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि शिक्षक और कर्मचारी संगठन इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं।




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