
असम में 11वीं कक्षा की 24 से 29 मार्च तक होने वाली सभी परीक्षाएं प्रश्नपत्र लीक होने के कारण रद्द कर दी गई हैं। असम के शिक्षा मंत्री रनोज पेगू ने जानकारी दी कि इन परीक्षाओं में कुल 36 विषय शामिल थे। इससे पहले, 21 मार्च को गणित का प्रश्नपत्र लीक होने की खबर सामने आई थी, जिसके बाद अधिकारियों को परीक्षा रद्द करनी पड़ी और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
प्रश्नपत्र लीक और स्कूलों पर कार्रवाई
शिक्षा मंत्री रनोज पेगू ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर बताया कि प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा प्रोटोकॉल के उल्लंघन की वजह से एचएस प्रथम वर्ष (कक्षा 11) की सभी शेष परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। परीक्षा के नए कार्यक्रम को लेकर सोमवार को बोर्ड की बैठक में फैसला लिया जाएगा।
शिक्षा बोर्ड की जांच में सामने आया कि 18 स्कूलों ने परीक्षा से एक दिन पहले ही प्रश्नपत्रों की सील तोड़ दी थी, जिससे लीक की घटना हुई। इसमें तीन सरकारी संस्थान और 15 निजी स्कूल शामिल थे।
15 निजी स्कूलों की संबद्धता निलंबित
असम राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड (ASSEB) ने 10 जिलों के 15 निजी स्कूलों की संबद्धता निलंबित कर दी है, क्योंकि उन्होंने निर्धारित समय से पहले गणित के प्रश्नपत्रों की सील तोड़ी थी। इसके अलावा, राज्य सरकार तीन अन्य स्कूलों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करेगी।
मंत्री पेगू ने बताया कि पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जाएगी और इन स्कूलों को 2025-26 शैक्षणिक सत्र के लिए कक्षा 11 के छात्रों को प्रवेश देने से रोक दिया गया है।
पुलिस जांच और एफआईआर दर्ज
ASSEB परीक्षा नियंत्रक (प्रभारी) रंजन कुमार दास के अनुसार, गुवाहाटी स्थित सीआईडी मुख्यालय में एक प्राथमिकी दर्ज कराई गई है, जबकि 18 अन्य पुलिस थानों में संबंधित स्कूलों के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा।
उन्होंने कहा, “हमारा मानना है कि सभी 18 स्कूलों ने प्रश्नपत्र लीक नहीं किए हैं। संभवतः एक या दो केंद्रों से पेपर लीक हुआ और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पुलिस जांच के बाद दोषियों की पहचान की जाएगी।”
बढ़ती लीक की घटनाएं और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
यह पहली बार नहीं है जब असम में परीक्षा से जुड़े घोटाले सामने आए हैं। पिछले सप्ताह बारपेटा जिले में 9वीं कक्षा की अंग्रेजी परीक्षा भी सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र लीक होने के कारण रद्द करनी पड़ी थी।
लगातार हो रहे प्रश्नपत्र लीक की घटनाएं असम की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा सुरक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार और शिक्षा बोर्ड इस समस्या से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।




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