
अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा जैसे देशों में भारतीय छात्रों के लिए पढ़ाई करना मुश्किल हो चुका है, खासकर वीजा नियमों में बड़े बदलावों के कारण। कुछ देशों में छात्रों की संख्या पर सीमाएं लगा दी गई हैं, तो कहीं वीजा के लिए शर्तें कड़ी कर दी गई हैं। इसके चलते अब भारतीय छात्र ऐसे देशों की ओर रुख कर रहे हैं, जहां उन्हें इन परेशानियों का सामना न करना पड़े। न्यूजीलैंड, इस संदर्भ में एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है और भारतीय छात्रों के लिए एक पॉपुलर डेस्टिनेशन बन चुका है।
कोविड महामारी के बाद न्यूजीलैंड में विदेशी छात्रों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। मौजूदा सरकार और विश्वविद्यालयों ने छात्रों को आकर्षित करने के लिए स्कॉलरशिप्स का प्रस्ताव रखा है, साथ ही वीजा नियमों को सरल बनाया गया है। इसके अलावा, पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा की अवधि को भी बढ़ा दिया गया है। 2019 में कोविड से पहले न्यूजीलैंड में 1.20 लाख विदेशी छात्र पढ़ाई कर रहे थे, जबकि 2024 के अंत तक यह संख्या बढ़कर 95 हजार से 1 लाख तक हो सकती है, जो देश में छात्रों की बढ़ती संख्या को दर्शाता है।
न्यूजीलैंड ने हाल ही में न्यूजीलैंड एक्सलेंस अवार्ड 2025 का ऐलान किया, जिसके तहत भारतीय छात्रों को 29 स्कॉलरशिप दी जाएंगी। इन स्कॉलरशिप्स का उद्देश्य अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट कोर्स के लिए भारतीय छात्रों को प्रोत्साहित करना है। स्कॉलरशिप की वैल्यू 5000 से लेकर 20,000 न्यूजीलैंड डॉलर (2.5 से 10 लाख रुपये) तक है। साथ ही, न्यूजीलैंड की कई प्रमुख यूनिवर्सिटीज भी अपने यहां एडमिशन पाने वाले छात्रों को स्कॉलरशिप प्रदान करती हैं, ताकि उनका पढ़ाई का खर्च कम हो सके।
न्यूजीलैंड की वीजा पॉलिसी और पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा की वजह से भी भारतीय छात्र यहां आ रहे हैं। जहां कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में छात्रों की संख्या सीमित की गई है, वहीं न्यूजीलैंड ने इस पर कोई रोक नहीं लगाई। यहां पर ग्रेजुएशन के बाद छात्रों को 3 साल तक काम करने का पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा मिलता है, जो मात्र 3 हफ्तों में प्राप्त किया जा सकता है। इस वीजा की खासियत यह है कि छात्रों को जल्दी ही रोजगार मिल जाता है, और वे देश में स्थायी रूप से काम कर सकते हैं।
न्यूजीलैंड में हेल्थकेयर, आईटी और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में कुशल पेशेवरों की हमेशा डिमांड बनी रहती है। इसके चलते, पढ़ाई पूरी करने के बाद भारतीय छात्र यहीं नौकरी करने लगते हैं, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित होता है।
क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2025 के अनुसार, ऑकलैंड यूनिवर्सिटी न्यूजीलैंड का नंबर 1 विश्वविद्यालय है, जिसे दुनियाभर में 65वां स्थान मिला है। इसके अलावा ओटागो यूनिवर्सिटी, वाइकाटो यूनिवर्सिटी, मासे यूनिवर्सिटी, विक्टोरिया यूनिवर्सिटी ऑफ वेलिंगटन, केंटरबरी यूनिवर्सिटी, लिंकन यूनिवर्सिटी, और ऑकलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी जैसे संस्थान भी शिक्षा के क्षेत्र में प्रमुख स्थान रखते हैं।
2021 से 2030 के बीच न्यूजीलैंड में भारतीय छात्रों की संख्या में 94% तक वृद्धि हो सकती है, और यह संख्या 12,686 से बढ़कर 24,594 तक पहुंचने का अनुमान है। वर्तमान में, न्यूजीलैंड में 7,300 से ज्यादा भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि कोविड से पहले यह आंकड़ा लगभग 10,000 था।




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