
यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) को सिविल सर्विसेज प्रारंभिक परीक्षा के तुरंत बाद आंसर की (Answer Key) जारी करनी चाहिए, जिससे परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा से पहले सवाल-जवाब से जुड़ी संभावित गलतियों को चुनौती दे सकें। संसद की एक स्थायी समिति ने राज्यसभा में पेश अपनी रिपोर्ट में यह सुझाव दिया है कि UPSC को आंसर की जारी करने और परीक्षा संरचना से जुड़े अहम मुद्दों पर विचार करने के लिए एक टीम का गठन करना चाहिए।
समिति ने UPSC परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया है। इसके साथ ही, पूरी परीक्षा प्रक्रिया को आधुनिक बनाने और बासवान समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए एक स्पष्ट टाइमलाइन तय करने की भी सिफारिश की है।
कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय से जुड़ी स्थायी समिति ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के लिए अपनी रिपोर्ट में कहा, “UPSC ने समिति को बताया कि वह पूरी चयन प्रक्रिया संपन्न हो जाने के बाद प्रीलिमिनरी एग्जामिनेशन की आंसर की प्रकाशित करती है। इससे अभ्यर्थियों को संभावित गलतियों को चुनौती देने का मौका नहीं मिल पाता, जो उनके मनोबल को प्रभावित कर सकता है और परीक्षा की वैधता को लेकर सवाल उठ सकते हैं।”
राज्यसभा सांसद बृज लाल की अध्यक्षता वाली समिति ने रिपोर्ट में कहा, “कड़ी जांच के बावजूद आंसर की में गलतियों की आशंका को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। विश्वसनीयता और निष्पक्षता बढ़ाने के लिए UPSC को प्रीलिमिनरी परीक्षा के तुरंत बाद आंसर की जारी करने पर विचार करना चाहिए। इससे अभ्यर्थियों को अपनी आपत्तियां उठाने का अवसर मिलेगा।”
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि विभाग को बासवान कमिटी की सिफारिशों को लागू करने के लिए एक स्पष्ट टाइमलाइन तय करनी चाहिए। इसके अलावा, आंसर की जारी करने और परीक्षा संरचना के महत्वपूर्ण मुद्दों को प्राथमिकता देने के लिए एक टीम बनाई जा सकती है, जिसमें कैंडिडेट्स और विषय के विशेषज्ञों से विचार-विमर्श भी किया जा सकता है, ताकि प्रभावी सुधार किए जा सकें।
यह ध्यान में रखते हुए कि यदि किसी सिफारिश को लागू करने के लिए नीति में बदलाव की आवश्यकता हो, तो सरकार से मंजूरी प्राप्त की जानी चाहिए।
UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा के पैटर्न और एज लिमिट सहित कई पहलुओं पर विचार करने के लिए इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के पूर्व निदेशक बी एस बासवान की अध्यक्षता में समिति बनाई गई थी। उसने 2016 में UPSC को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी।




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