
राज्यसभा ने मंगलवार को त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक, 2025 पर चर्चा की और उसे पारित करने का प्रस्ताव रखा। इस विधेयक के तहत गुजरात के आनंद में ‘त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय’ की स्थापना का प्रस्ताव है, जिसका उद्देश्य सहकारी समितियों के लिए योग्य जनशक्ति तैयार करना है। विश्वविद्यालय का नाम त्रिभुवनदास किशीभाई पटेल के नाम पर रखा गया है, जो भारत में सहकारी आंदोलन के अग्रदूतों में से एक थे और जिन्होंने अमूल की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
पिछले सप्ताह लोकसभा द्वारा पारित इस विधेयक को सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने केंद्रीय सहकारिता और गृह मंत्री अमित शाह की ओर से उच्च सदन में पेश किया था।
मंगलवार को राज्यसभा ने ध्वनिमत से त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक, 2025 को पारित कर दिया। इस विधेयक पर हुई चर्चा में कुल 28 सदस्यों ने भाग लिया। सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने इस मौके पर कहा कि देश की आधे से ज्यादा आबादी, यानी 50% से अधिक लोग कृषि क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा, देशभर में लगभग 8 लाख सहकारी संस्थान हैं, जिनसे करीब 30 करोड़ लोग जुड़े हुए हैं।
मंत्री मोहोल ने यह भी बताया कि यह विश्वविद्यालय सहकारी क्षेत्र का पहला विश्वविद्यालय होगा। इसका मुख्य उद्देश्य सहकारी क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के कौशल विकास और दक्ष पेशेवरों का निर्माण करना है। यह विश्वविद्यालय सहकारी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों और बोर्ड सदस्यों के लिए प्रशिक्षण का अहम केंद्र बनेगा। लंबे समय से सहकारी क्षेत्र में कर्मचारियों और पदाधिकारियों के प्रशिक्षण का मुद्दा लंबित था, जिसे अब इस विश्वविद्यालय के माध्यम से अखिल भारतीय स्तर पर हल किया जाएगा।
विधेयक में यह भी उल्लेख किया गया है कि सहकारी समितियों में विभिन्न प्रकार की नौकरियों (जैसे प्रबंधकीय, पर्यवेक्षी, प्रशासनिक, तकनीकी और परिचालन) के लिए कुशल और प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता होती है। इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए एक राष्ट्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना अनिवार्य है, जो शिक्षा, प्रशिक्षण और शोध के लिए एक व्यापक और मानकीकृत ढांचा प्रदान करेगा।
त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय सहकारी क्षेत्र में शिक्षा और प्रशिक्षण के नए अवसर प्रदान करेगा। यह विश्वविद्यालय युवाओं का कौशल विकास करेगा और डिग्री कार्यक्रमों के साथ-साथ दूरस्थ शिक्षा और ई-लर्निंग पाठ्यक्रम भी शुरू करेगा। इसका लक्ष्य हर वर्ष लगभग 8 लाख लोगों को प्रशिक्षण प्रदान करना है। साथ ही, यह विश्वविद्यालय डेयरी और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में क्षेत्र-विशिष्ट ‘उत्कृष्टता विद्यालय’ भी स्थापित करेगा।
इसके अलावा, त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय भारत भर में 284 सहकारी प्रशिक्षण संस्थानों को एकीकृत करेगा, मौजूदा केंद्रों की क्षमता को बढ़ाएगा, और देशभर में दीर्घकालिक सहकारी पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देगा। इस पहल के माध्यम से सहकारी क्षेत्र में शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए एक व्यापक और एकीकृत प्रणाली स्थापित की जाएगी, जो सहकारी क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभाएगी।




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