
कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने क्षेत्रीय भाषाओं में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने राजभवन में आयोजित एक समारोह में कन्नड़ में अनुवादित इंजीनियरिंग पुस्तकों के संग्रह का विमोचन किया। यह पहल कन्नड़ भाषी छात्रों के लिए तकनीकी शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने के उद्देश्य से की गई है।
ये अनुवादित पुस्तकें विशेष रूप से इंजीनियरिंग और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए तैयार की गई हैं। इसे अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीइ) और विश्वेश्वरैया प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (वीटीयू) के संयुक्त प्रयासों का परिणाम माना जा रहा है। यह प्रयास तकनीकी शिक्षा को मातृभाषा में सुलभ बनाने के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।
राज्यपाल का भाषण और सरकार की योजना
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल गहलोत ने कहा कि जर्मनी, फ्रांस, जापान, रूस और चीन जैसे विकसित देशों में शिक्षा, विशेष रूप से तकनीकी और वैज्ञानिक अध्ययन, मातृभाषा में दी जाती है। उन्होंने स्थानीय भाषा में शिक्षा के लाभ को रेखांकित करते हुए कहा कि इससे बौद्धिक विकास, रचनात्मकता और बेहतर समझ को बढ़ावा मिलता है।
गहलोत ने उच्च शिक्षा और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को क्षेत्रीय भाषाओं में शुरू करने की सरकार की योजना के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने तकनीकी पुस्तकों के भारतीय भाषाओं में अनुवाद की प्रक्रिया में एआइसीटीइ की भूमिका को भी स्वीकार किया, जिसमें वीटीयू को कन्नड़ अनुवादों के लिए नोडल केंद्र के रूप में नामित किया गया है।
समर्थन और विचार
कार्यक्रम में उपस्थित उच्च शिक्षा मंत्री एम. सी. सुधाकर ने इस पहल के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं में तकनीकी शिक्षा देने से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक छात्रों तक पहुंच सकेगी। जब छात्र अपनी मातृभाषा में तकनीकी विषयों को समझेंगे, तो नवाचार और शोध में उनका योगदान बढ़ेगा।
समारोह में एआइसीटीइ के अध्यक्ष प्रो. टी. जी. सीताराम, उच्च शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव श्रीकर और वीटीयू के कुलपति प्रो. एस. विद्याशंकर भी उपस्थित थे।




Add comment