
फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस (शिक्षक संगठन) के चेयरमैन डॉ. हंसराज सुमन ने दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों द्वारा ओबीसी कोटे की सेकेंड ट्रांच के पदों पर गेस्ट टीचर्स लगा आरक्षण समाप्त करने की साजिश बताया है। पिछले कुछ वर्षों से कॉलेजों में एडहॉक व टेंपरेरी पदों पर नियुक्त करने की प्रक्रिया समाप्त कर दी गई है। कॉलेजों को चाहिए कि सेकेंड ट्रांच के पदों का रोस्टर रजिस्टर तैयार करके उसे विश्वविद्यालय प्रशासन से पास कराएँ और उसका विज्ञापन निकालें। लेकिन कॉलेज ऐसा नहीं कर रहे हैं।
डॉ. सुमन ने कुछ कॉलेजों द्वारा एडहॉक शिक्षकों के पदों को समाप्त कर उन्हें गेस्ट टीचर्स में तब्दील किए जाने की भी कड़े शब्दों में निंदा की है और कहा कि गेस्ट टीचर्स की आड़ में धीरे-धीरे केंद्र सरकार की आरक्षण नीति को समाप्त कर उन पदों को सामान्य वर्गों के अभ्यर्थियों से भरना चाहते हैं। उन्होंने बताया है कि गेस्ट टीचर्स के पदों पर भी केंद्र सरकार की आरक्षण नीति को लागू किया गया, लेकिन कुछ कॉलेज इस नियम की अवहेलना कर रहे हैं। डीओपीटी के नियमानुसार 45 दिन या उससे अधिक समय के लिए खाली पदों पर भी आरक्षण दिया जाता है। इसके तहत एससी-15, एसटी-7.5, ओबीसी -27, पीडब्ल्यूडी-5 फीसदी पर आरक्षण देकर पदों को भरा जाना चाहिए। समस्या यह है कि जिन कॉलेजों में किसी विभाग में अपने यहाँ 2 पद गेस्ट टीचर्स से भरने के निकाले उसमें 1 पद एससी व 1 अनारक्षित को दिया है, जबकि यह दोनों पद एससी के लिए होने चाहिए। उन्होंने बताया है कि जब इन पदों को स्थायी सहायक प्रोफेसर से भरते हैं तो कॉलेज इन्हें अनारक्षित पद कर देते हैं जबकि यह ओबीसी सेकेंड ट्रांच के पद हैं।
डॉ. हंसराज सुमन ने बताया है कि जिन कॉलेजों ने ओबीसी कोटे की सेकेंड ट्रांच के पदों पर स्थायी सहायक प्रोफेसर के पदों के विज्ञापन नहीं निकाले। अब वे कॉलेज एडहॉक टीचर्स के स्थान पर गेस्ट टीचर्स के माध्यम से इन पदों को निकालकर भर रहे हैं, जबकि उक्त ओबीसी कोटे के सेकेंड ट्रांच के पदों को शिक्षा मंत्रालय / यूजीसी द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रों के एडमिशन दिए जाने के बाद दो किस्तों में ओबीसी कोटे से ही भरा जाना था। लेकिन कॉलेजों ने ओबीसी कोटे की सेकेंड ट्रांच के पदों को भरने के लिए स्थायी नियुक्ति संबंधी विज्ञापन नहीं निकाला है। उनका कहना है कि जब यह पद ओबीसी कोटे के सेकेंड ट्रांच में केन्द्र सरकार द्वारा दिए गए हैं तो किस आधार पर इन पदों को स्थायी /एडहॉक टीचर्स से गेस्ट टीचर्स में तब्दील किया जा रहा है ? गेस्ट टीचर्स एक या दो महीने के लिए अल्पकालीन व्यवस्था है ना कि स्थायी। इसलिए इन पदों पर एडहॉक या टेंपरेरी टीचर्स की व्यवस्था करते हुए रोस्टर के अनुसार भरा जाए। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह से मांग की है कि ओबीसी सेकेंड ट्रांच के पदों को भरने संबंधी एक सर्कुलर कॉलेज प्रिंसिपलों को जारी करें और इन पदों को ओबीसी से ही एडहॉक / टेंपरेरी पदों से भरने के सख्त निर्देश दें। साथ ही उन्होंने शिक्षकों, कर्मचारियों व छात्रों के एडमिशन के आंकड़ों का रोस्टर रजिस्टर वेबसाइट पर अपलोड करने की भी मांग की है।
डॉ.सुमन ने बताया है कि विश्वविद्यालय ने पिछले तीन साल से एडहॉक टीचर्स के पदों को समाप्त कर उन्हें गेस्ट टीचर्स में तब्दील कर दिया है। इससे सबसे ज्यादा नुकसान आरक्षित श्रेणी के उन अभ्यर्थियों को हुआ है जिनसे यह भरे जाने थे। उन्होंने बताया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने विभागों व कॉलेज प्रिंसिपलों को सर्कुलर जारी कर कहा था कि गेस्ट टीचर्स के पदों पर भी रोस्टर और आरक्षण के नियमों को लागू करते हुए इन पदों को भरा जाए लेकिन इस सर्कुलर का कॉलेजों के प्रिंसिपल पालन नहीं कर रहे हैं। कुछ कॉलेजों द्वारा खुलेआम आरक्षण समाप्त करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने बताया है कि जहाँ सिर्फ़ ओबीसी से पद भरा जाना चाहिए वहाँ कॉलेज प्रशासन एक अनारक्षित और एक ओबीसी या एससी से पदों को भर रहा है। उनका कहना है कि आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को भी पढ़ाने का अवसर प्राप्त हो। उनका कहना है कि जब भी इन पदों पर नियुक्ति हो उसमें रोस्टर और आरक्षण का केंद्र सरकार के नियमानुसार एससी, एसटी, ओबीसी, पीडब्ल्यूडी के अभ्यर्थियों को आरक्षण दिया जाये ताकि इन वर्गों के साथ सामाजिक न्याय हो।




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