
ओडिशा हाईकोर्ट ने एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए कॉलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (KIIT), भुवनेश्वर के खिलाफ नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (NHRC) द्वारा शुरू की गई सभी कार्रवाई पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है। यह मामला फरवरी 2025 में एक नेपाली छात्रा की कथित आत्महत्या से जुड़ा है।
न्यायमूर्ति डॉ. संजीब कुमार पाणिग्रही ने यह रोक लगाते हुए कहा कि अर्ध-न्यायिक कार्रवाई में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन आवश्यक है। उन्होंने कहा, “प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन केवल औपचारिकता नहीं है, यह अनिवार्य है। जब किसी व्यक्ति या संस्था को अपनी बात कहने का अवसर नहीं दिया जाता, तो पूरे प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठता है।”
हाईकोर्ट ने NHRC के दिनांक 27 मार्च, 2025 के आदेश और मामला संख्या 134/18/28/2025-WC के तहत की जा रही सभी आगे की कार्रवाई को अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल 2025 को होगी।
गौरतलब है कि 12 मार्च, 2024 को मृतक छात्रा ने KIIT के इंटरनेशनल रिलेशंस ऑफिसर (IRO) से एक पुरुष सहपाठी द्वारा आपत्तिजनक निजी तस्वीरें साझा करने की शिकायत की थी।मामला विश्वविद्यालय की डिसिप्लिनरी कमिटी को सौंपा गया जिसने आरोपी को वह सामग्री हटाने का निर्देश दिया। छात्रा ने स्पष्ट किया कि वह मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहती, जिसके चलते इसे आंतरिक शिकायत समिति (ICC) या स्थानीय पुलिस को नहीं भेजा गया।
जनवरी 2025 में फिर से दोनों छात्रों के बीच टकराव हुआ, जिसके बाद काउंसलिंग कराकर उन्हें एक-दूसरे से कोई संपर्क न रखने का लिखित समझौता कराया गया।इसके बावजूद, 16 फरवरी 2025 को छात्रा अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाई गई। अगले दिन एफआईआर दर्ज की गई और आरोपी छात्र को गिरफ्तार कर लिया गया, जो अब तक हिरासत में है।
NHRC ने 3 मार्च 2025 को जांच शुरू की और एक तथ्यान्वेषण समिति का गठन किया जिसमें कानूनी व जांच अधिकारी शामिल थे। यह टीम 6 से 8 मार्च के बीच कैंपस पहुंची और जांच रिपोर्ट जमा की। इसके आधार पर NHRC ने 27 मार्च को एकतरफा आदेश जारी किया।
KIIT की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि विश्वविद्यालय को ना तो जांच रिपोर्ट दी गई, ना ही अपनी बात रखने का अवसर मिला, जो कि प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है।
हाईकोर्ट ने इस तर्क से सहमति जताई और कहा कि KIIT को सुनवाई का अवसर न देना जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है। इसीलिए कोर्ट ने NHRC के आदेश और सभी कार्यवाहियों पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।




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