
हर साल लाखों युवा JEE और GATE जैसी कठिन परीक्षाएं पास करने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। इनमें से कई का सपना होता है कि किसी तरह उन्हें IIT में दाखिला मिल जाए। लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक पोस्ट ने इस सपने के पीछे की हकीकत को सामने ला दिया है।
देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT दिल्ली में शोधरत एक छात्र की कहानी ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। यह पोस्ट LinkedIn पर रेहान अख्तर नाम के यूज़र ने शेयर की, जिसमें उन्होंने अपने एक मित्र की जिंदगी की वास्तविकता बयान की है।
रेहान ने लिखा कि उनका दोस्त JEE और GATE जैसी कठिन परीक्षाएं पास कर चुका है और अब IIT दिल्ली से PhD कर रहा है। वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे उभरते हुए क्षेत्र में शोध कर रहा है, अंडरग्रेजुएट छात्रों को पढ़ाता है, सैकड़ों शोध पत्रों की समीक्षा करता है और कई शोध पत्र प्रकाशित भी कर चुका है। इसके बावजूद उसे मात्र ₹35,000 की मासिक स्कॉलरशिप मिलती है, जिससे वह मुश्किल से अपना घर चला पा रहा है। परिवार को आर्थिक मदद देना तो दूर की बात है, वह किराया भरने में भी संघर्ष कर रहा है।
पोस्ट में रेहान ने लिखा, “हमारा सिस्टम औसत दर्जे को इनाम देता है और असाधारण प्रतिभा को सिर्फ जीने लायक छोड़ देता है।” उन्होंने यह सवाल उठाया कि जब एक सामान्य कॉलेज से ग्रेजुएट व्यक्ति सीमित स्किल्स के साथ आरामदायक जिंदगी जी सकता है, तो देश के सर्वोच्च संस्थान में रिसर्च कर रहा छात्र क्यों संघर्ष कर रहा है?
रेहान ने यह भी कहा कि PhD छात्र सिर्फ विद्यार्थी नहीं होते, बल्कि शिक्षक, इनोवेटर और भविष्य निर्माता भी होते हैं। लेकिन सिस्टम उन्हें नजरअंदाज कर रहा है। उन्होंने लिखा, “जुनून का अर्थ गरीबी नहीं होना चाहिए।”
इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने कहा कि आज के समय में सिर्फ स्कोर नहीं, स्किल्स भी जरूरी हैं। वहीं, कई लोगों ने सहमति जताई कि शोधकर्ताओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता उनके कार्य और योगदान के हिसाब से बेहद कम है और अब समय आ गया है कि इस व्यवस्था में बदलाव लाया जाए।




Add comment