
दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) का लंबे समय से प्रतीक्षित पूर्वी दिल्ली स्थित ताहिरपुर कैंपस अब जुलाई सत्र से शुरू होने जा रहा है। यह कैंपस अब तक तमाम जरूरी एनओसी और मूलभूत सुविधाएं जैसे बिजली व पानी के अभाव में शुरू नहीं हो पाया था, लेकिन अब सभी आवश्यक अनुमतियां प्राप्त हो चुकी हैं। प्रशासन ने इसे जुलाई से शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है।
सातों दिन दो शिफ्ट में चलेंगी पीसीपी कक्षाएं
नए कैंपस में सातों दिन दो शिफ्ट में पर्सनल कॉन्टेक्ट प्रोग्राम (पीसीपी) की कक्षाएं संचालित की जाएंगी। इससे पूर्वी दिल्ली, उत्तर-पूर्वी दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली, वैशाली, इंदिरापुरम, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम के छात्रों को विशेष लाभ मिलेगा। साथ ही अन्य नियमित कॉलेजों पर कक्षाएं आयोजित करने का दबाव भी कम होगा।
तीन साल में तैयार हुआ अत्याधुनिक कैंपस
इस अत्याधुनिक सात मंजिला भवन को लगभग 40 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। वर्ष 2020 में कोरोना महामारी और प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगाए गए ग्रैप नियमों के कारण निर्माण कार्य में देरी हुई। इसके बाद विभिन्न सरकारी एजेंसियों से एनओसी मिलने में भी समय लगा। अब फायर एनओसी मिल चुकी है और पानी की सप्लाई भी चालू हो गई है।
परीक्षा और मूल्यांकन की गतिविधियां भी होंगी संचालित
एसओएल की निदेशक प्रो. पायल मागो ने बताया कि यह कैंपस अब पूरी तरह तैयार है और एसओएल प्रशासन को सौंपे जाने की प्रक्रिया चल रही है। कैंपस में न सिर्फ कक्षाएं संचालित होंगी बल्कि परीक्षा और मूल्यांकन से जुड़ी गतिविधियों का संचालन भी यहीं से किया जाएगा। प्रतिदिन दो शिफ्ट में लगभग दो हजार छात्रों को पढ़ाई की सुविधा मिल सकेगी।
आधुनिक प्रयोगशालाओं से लैस ग्रीन कैंपस
यह ग्रीन कैंपस ऑडियो-विजुअल लैब और आधुनिक प्रयोगशालाओं से सुसज्जित होगा। यहां छात्रों को कंप्यूटर और साइकोलॉजी लैब की भी सुविधा मिलेगी। छात्र कक्षा के बाद प्रैक्टिकल अभ्यास के लिए इन लैब्स का उपयोग कर सकेंगे। अभी एसओएल के कैंपस पश्चिमी, दक्षिणी और उत्तरी दिल्ली में स्थित हैं। पूर्वी दिल्ली में इस कैंपस के शुरू होने से दिल्ली के चारों दिशाओं में एसओएल की उपस्थिति सुनिश्चित हो जाएगी। वर्तमान में एसओएल में 1.20 लाख से अधिक छात्र पंजीकृत हैं, जिनकी बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए यह नया कैंपस एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।




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