
भारतीय मूल की डॉ. मुमताज पटेल को यूनाइटेड किंगडम की प्रतिष्ठित संस्था रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियन (RCP) का नया अध्यक्ष चुना गया है। वे इस 500 साल से अधिक पुरानी संस्था की 123वीं अध्यक्ष, पहली इंडो-एशियन मुस्लिम महिला और कुल मिलाकर पांचवीं महिला अध्यक्ष हैं।
भारतीय विरासत, ब्रिटिश परवरिश
डॉ. पटेल का जन्म इंग्लैंड के लंकाशायर में हुआ था। वे भारतीय प्रवासी माता-पिता की संतान हैं। वर्तमान में वे मैनचेस्टर में कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी विशेषज्ञ) के तौर पर कार्यरत हैं और ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS) के तहत पोस्ट-ग्रेजुएट एसोसिएट डीन की भूमिका भी निभा रही हैं।
डॉ. पटेल का नेतृत्व विजन
अपनी नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. मुमताज पटेल ने कहा, “मैं RCP को उसका सर्वोत्तम स्वरूप देने के लिए प्रतिबद्ध हूं, ताकि हम अपने सदस्यों को करियर के हर स्तर पर मजबूत समर्थन दे सकें और मरीज़ों को उच्च गुणवत्ता की स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जा सके।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे अपने 20 वर्षों के अनुभव और मूल्य-आधारित नेतृत्व से इस जिम्मेदारी को निभाएंगी।
पहले भी निभा चुकी हैं कई अहम भूमिकाएं
डॉ. पटेल RCP में पहले सीनियर सेंसर और वाइस प्रेसिडेंट – एजुकेशन एंड ट्रेनिंग के रूप में कार्य कर चुकी हैं। वे जून 2024 से एक्टिंग प्रेसिडेंट के रूप में सेवा दे रही थीं। अब स्थायी अध्यक्ष बनने के बाद, वे RCP काउंसिल की अध्यक्षता करेंगी और बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की सदस्य भी होंगी।
RCP में नेतृत्व परिवर्तन पर उत्साह
RCP की ट्रस्टी चेयर डॉ. डायना वाल्फोर्ड ने डॉ. पटेल पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा, “वे एक चुनौतीपूर्ण समय में यह जिम्मेदारी संभाल रही हैं, लेकिन उनके नेतृत्व में RCP नई ऊंचाइयों को छुएगा।”
युवा डॉक्टरों और भविष्य की तैयारियों पर जोर
RCP के रेजिडेंट डॉक्टर कमिटी के चेयर डॉ. एंथनी मार्टिनेली और डॉ. कैथरीन रोवन ने कहा कि वे डॉ. पटेल के साथ मिलकर युवा डॉक्टरों को बेहतर समर्थन और मार्गदर्शन देने के लिए उत्साहित हैं।
ब्रिटिश जेरियाट्रिक्स सोसाइटी के प्रेसिडेंट प्रो. जगदीप धेसी ने भी डॉ. पटेल की नई भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि “आने वाले समय में अधिकांश मरीज़ बुज़ुर्ग होंगे, जिन्हें समग्र और व्यक्ति-केंद्रित देखभाल की आवश्यकता होगी – डॉ. पटेल को इसके लिए रणनीतिक दिशा तय करनी होगी।”
डॉ. मुमताज पटेल की यह उपलब्धि न सिर्फ भारतीय समुदाय के लिए गर्व की बात है, बल्कि वैश्विक चिकित्सा नेतृत्व में विविधता और समावेशिता की एक मिसाल भी है।




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