Edinbox Hindi

पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. कस्तूरीरंगन का निधन, भारत के अंतरिक्ष और शिक्षा क्षेत्र को दी अमूल्य विरासत

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. कस्तूरीरंगन का निधन हो गया है। 84 वर्षीय कस्तूरीरंगन ने बंगलूरू में अंतिम सांस ली, जहां वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनका पार्थिव शरीर 27 अप्रैल को अंतिम दर्शन के लिए रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (आरआरआई) में रखा जाएगा। डॉ. कस्तूरीरंगन के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने इसरो में अथक परिश्रम से कार्य किया और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। साथ ही, पीएम मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मसौदा तैयार करने में उनके योगदान के लिए देश हमेशा उनका आभारी रहेगा।

डॉ. कस्तूरीरंगन का जन्म 24 अक्टूबर 1940 को केरल के एर्नाकुलम में हुआ था। उन्होंने इसरो में लंबे समय तक सेवाएं दीं और 1994 से 2003 तक इसरो के चेयरमैन और भारत सरकार के सचिव पद पर कार्यरत रहे। इसरो से सेवानिवृत्ति के बाद वे इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज के अध्यक्ष बने और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सदस्य भी रहे। भारत सरकार ने विज्ञान के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया। वे 2003 से 2009 तक राज्यसभा सदस्य भी रहे और इसके अलावा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज़, बंगलूरू के डायरेक्टर, एनआईआईटी यूनिवर्सिटी राजस्थान के चेयरमैन और नई शिक्षा नीति 2020 के ड्राफ्ट को तैयार करने वाली समिति के अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई।

इसरो के अध्यक्ष के रूप में उनके नेतृत्व में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं। उन्होंने ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) का सफल प्रक्षेपण, जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) की पहली सफल उड़ान, और आईआरएस-1सी व 1डी उपग्रहों के डिजाइन, विकास और प्रक्षेपण जैसे महत्वपूर्ण मिशनों की अगुवाई की। इसके अलावा, उन्होंने दूसरी पीढ़ी के इनसेट उपग्रहों का निर्माण और प्रक्षेपण तथा महासागर अवलोकन उपग्रहों (IRS-P3/P4) के प्रक्षेपण में भी महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।

डॉ. कस्तूरीरंगन न केवल अंतरिक्ष अभियानों के विशेषज्ञ थे, बल्कि उन्होंने उच्च ऊर्जा एक्स-रे और गामा किरण खगोल विज्ञान, प्रकाशीय खगोल विज्ञान और ब्रह्मांडीय एक्स-रे स्रोतों के अध्ययन में भी अग्रणी शोध किया। उनके शोध कार्यों में आकाशीय गामा किरणों, ब्रह्मांडीय एक्स-रे और निचले वायुमंडल में इनके प्रभावों का विश्लेषण शामिल था, जिसने वैज्ञानिक जगत में उन्हें एक सम्मानित स्थान दिलाया। उनके योगदान भारत के विज्ञान, शिक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए अमूल्य रहे हैं।

 

 

Asmita Sarkar

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed