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जम्मू-कश्मीर के छात्रों ने दिल्ली विश्वविद्यालय पर लगाया भेदभाव का आरोप, गृह मंत्री से की हस्तक्षेप की मांग 

जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) ने आज, 6 मई को एक कड़े शब्दों वाला पत्र केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भेजा है, जिसमें उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) द्वारा जारी उस परिपत्र को तत्काल वापस लेने की मांग की है जिसमें केवल जम्मू-कश्मीर के छात्रों से उनके व्यक्तिगत विवरण मांगे गए हैं।

इस परिपत्र के अनुसार, छात्रों से उनके निवास का पता, संपर्क जानकारी और कोर्स संबंधित जानकारी जैसी व्यक्तिगत जानकारियाँ मांगी गई हैं। JKSA ने इस कदम को एक विशेष क्षेत्र के छात्रों को लक्षित कर “सामुदायिक प्रोफाइलिंग” और उनके समानता, गैर-भेदभाव और निजता के अधिकारों का उल्लंघन बताया है।

छात्र संगठन ने इसे असंवैधानिक बताते हुए कहा कि भारत के किसी अन्य राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के छात्रों के लिए ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है।

पत्र में कहा गया है, “यह निर्देश… एक पूरे छात्र समुदाय के संवैधानिक अधिकारों और गरिमा को ठेस पहुंचाता है।” संगठन ने दिल्ली विश्वविद्यालय पर समावेश की भावना को बढ़ावा देने के बजाय “चयनात्मक निगरानी” को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। एसोसिएशन ने यह भी बताया कि ऐसे सभी विवरण पहले से ही प्रवेश प्रक्रिया में एकत्र किए जाते हैं, फिर इस नए निर्देश की आवश्यकता ही क्यों?

पत्र में हाल के सप्ताहों में देशभर में कश्मीरी छात्रों के साथ बढ़ती कथित परेशानियों का भी उल्लेख किया गया है, और कहा गया है कि यह परिपत्र उनके डर और अलगाव की भावना को और बढ़ा रहा है।

पत्र में सवाल उठाया गया है, “क्या इन कदमों से यह संकेत देने की कोशिश की जा रही है कि जम्मू-कश्मीर के छात्र देश के अन्य नागरिकों से कमतर हैं?” पत्र में यह भी कहा गया कि विश्वविद्यालयों को “स्वतंत्रता, विचार और गरिमा के दुर्ग” बने रहना चाहिए।

JKSA ने मांग की है कि दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा जारी परिपत्र को तुरंत रद्द किया जाए, विश्वविद्यालय द्वारा इस तरह की कार्रवाई से सार्वजनिक रूप से किनारा किया जाए, और क्षेत्र, जातीयता या धर्म के आधार पर प्रोफाइलिंग रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार किए जाएं।

पत्र के अंत में एसोसिएशन ने इस निर्देश को भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और “विविधता में एकता” की भावना के साथ धोखा बताते हुए समानता और सहानुभूति की अपील की। पत्र में कहा गया है, “सच्ची राष्ट्रीय एकता निगरानी से नहीं, बल्कि समावेश से आएगी।”

Asmita Sarkar

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